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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी के खिलाफ गुजरात पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह सिर्फ एक कविता है और किसी खास समुदाय के खिलाफ नहीं है।
मामले की सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा, कि यह एक कविता है। यह किसी धर्म के खिलाफ नहीं है। इसमें अप्रत्यक्ष रूप से कहा गया है कि भले ही कोई हिंसा में लिप्त हो, हम हिंसा में शामिल नहीं होंगे। कोर्ट ने गुजरात हाई कोर्ट के फैसले पर भी आपत्ति जताई और कहा कि हाईकोर्ट कविता का सही अर्थ नहीं समझ सका। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के वकील को फटकार लगाई और कहा, थोड़ा दिमाग लगाइए और फिर हमारे सामने आइए।
क्या है पूरा मामला?
3 जनवरी को गुजरात पुलिस ने इमरान प्रतापगढ़ी के खिलाफ केस दर्ज किया था। आरोप था कि उन्होंने जामनगर में एक सामूहिक विवाह समारोह में भड़काऊ गीत पोस्ट किया। 21 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में इमरान प्रतापगढ़ी के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। आरोप था कि प्रतापगढ़ी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें बैकग्राउंड म्यूजिक के बोल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले थे। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद तय की है।

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