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सिख दंगों के दौरान दो सिखों की हत्या से जुड़ा मामला
नई दिल्ली। करीब 41 साल बाद राउज एवेन्यू कोर्ट ने बुधवार को पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार को सिख दंगों के दौरान दो सिखों की हत्या के मामले में दोषी मना है। कोर्ट 18 फरवरी को सजा का ऐलान करेगी।
इसके पहले दिसंबर 2018 में दिल्ली हाईकोर्ट की डबल बेंच ने एक अन्य मामले में सज्जन कुमार को दोषी मनाकर उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उन्हें हिंसा कराने और दंगा भड़काने का दोषी पाया गया था। पहले से ही वे तिहाड़ जेल में सजा काट रहे हैं।
1984 में हत्या, 2021 में आरोप तय, 2025 में फैसला…
1 नवंबर 1984 को सरस्वती विहार में जसवंत सिंह और तरुणदीप सिंह की हत्या की गई थी। पंजाबी बाग पुलिस स्टेशन में सज्जन कुमार के खिलाफ केस दर्ज हुआ था।
इसके बाद 16 दिसंबर 2021 को पुलिस जांच को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने सज्जन के खिलाफ आरोप तय किए थे। इस दौरान पीड़ित के वकील ने दलील दी थी, कि बड़ी भीड़ खतरनाक हथियार लेकर सरस्वती विहार में घुसी। उन्होंने लूटपाट, आगजनी और तोड़फोड़ शुरू कर दी। वे सिखों की संपत्ति पर हमला कर रहे थे। वे इंदिरा गांधी की हत्या का बदला ले रहे थे। भीड़ ने जसवंत के घर हमला किया, उसकी और बेटे की हत्या कर दी। लूटपाट के बाद घर में आग लगा दी।
इसके बाद स्पेशल जज कावेरी बावेजा ने फैसला सुनाते हुए कहा कि इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि सज्जन कुमार न केवल भीड़ में शामिल थे, बल्कि भीड़ की अगुआई भी कर रहे थे।
वहीं 31 जनवरी 2025 को हुई सुनवाई में राउज एवेन्यू कोर्ट ने सज्जन पर फैसला टाल दिया था। इसके पहले 8 जनवरी और 16 दिसंबर 2024 को भी फैसला टाला गया था।
दिसंबर 2021 को कांग्रेस नेता सज्जन ने मामले में खुद को निर्दोष बताकर ट्रायल का सामना करने की बात कही थी। ट्रायल में सज्जन कुमार को दोषी माना गया था। इसके बाद उनके खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था।
दरअसल, सुल्तानपुरी इलाके में 1984 के सिख दंगों के दौरान 3 लोगों की हत्या हुई थी। दंगे में सीबीआई की एक अहम गवाह चाम कौर ने आरोप लगाया था कि सज्जन भीड़ को भड़का रहे थे। सज्जन आजीवन कारावास की सजा काट रहे दिल्ली हाईकोर्ट ने 17 दिसंबर 2018 को सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। दरअसल, 1984 के सिख विरोधी दंगों के बाद दिल्ली में पांच सिखों की हत्या और गुरुद्वारा जला दिया गया था। इसी केस में सज्जन कुमार को दोषी पाया गया और उन्हें सजा सुनाई गई।

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