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नवंबर में ही करवाएं दिल्ली का चुनाव, केजरीवाल का दांव, नवंबर में चुनाव
-केजरीवाल दो दिन में छोड़ेंगे सीएम पद…विधायक दल की बैठक में होगा अगले सीएम का फैसला

नई दिल्ली। दिल्ली शराब नीति मामले में जेल से जमानत पर रिहा हुए आम आदमी पार्टी के प्रमुख और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दो दिनों के बाद दिल्ली से मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की घोषणा की है और समय से पहले चुनाव कराने की मांग की है। केजरीवाल ने कहा कि उनकी जगह आम आदमी पार्टी का ही कोई विधायक मुख्यमंत्री बनेगा। आप संयोजक ने चुनाव आयोग से अपील करते हुए कहा कि नवंबर में दिल्ली का चुनाव करवाएं।
दिल्ली विधानसभा का कार्यकाल फरवरी 2025 में खत्म हो रहा है। यानी सरकार के पास चुनाव में सिर्फ 5 महीने ही बचे हैं। इस दौरान सरकारें लोकलुभावन चुनावी फैसले लेती हैं। केजरीवाल कोर्ट की शर्तों में बंधे। जेल से छूटने के बाद केजरीवाल के साथ सिंपथी है। दो-तीन महीने पहले दिल्ली में चुनाव की मांग कर केजरीवाल इस सिंपथी को भुनाना चाहेंगे। भ्रष्टाचार के मामले में जमानत पर रिहा होने के बाद अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वह अग्निपरीक्षा देने के लिए तैयार हैं और अपनी बेगुनाही साबित करने के बाद ही जनता की अदालत में जाएंगे। आइए पूरे राजनीतिक घटनाक्रम को समझते और जानते हैं कि भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार होने के बाद अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं दिया था और अब जेल से रिहा होने के बाद क्यों इस्तीफा देने के लिए तैयार हो गये हैं?
मैं और सिसोदिया जनता के बीच जाएंग
तिहाड़ जेल से जमानत पर बाहर आने के बाद अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली की जनता का फैसला आने तक मैं मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नहीं बैठूंगा। उन्होंने कहा कि आज से दो दिन के बाद मैं इस्तीफा देने जा रहा हूं मैं तब तक सीएम की कुर्सी पर नहीं बैठूंगा, जब तक जनता अपना फैसला नहीं सुना देती कि केजरीवाल ईमानदार है। उन्होंने आगे कहा कि मेरे इस्तीफा देने के बाद दिल्ली विधानसभा भंग नहीं होगी। आम आदमी पार्टी के विधायक दल की बैठक में नया मुख्यमंत्री चुना जाएगा। इस दौरान केजरीवाल ने कहा कि इस दौरान मनीष सिसोदिया भी कोई जिम्मेदारी नहीं लेंगे। मैं और सिसोदिया जनता के बीच जाएंगे।
महाराष्ट्र के साथ कराएं दिल्ली में चुनाव
अरविंद केजरीवाल ने इस दौरान चुनाव आयोग से मांग करते हुए कहा कि दिल्ली में महाराष्ट्र और झारखंड के साथ चुनाव आयोजित कराए जाएं। बता दें कि चुनाव आयोग ने अभी महाराष्ट्र और झारखंड में चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं किया है, लेकिन हरियाणा का ऐलान किया जा चुका है।
आप ने बदली देश की राजनीति
इसके पहले सीएम केजरीवाल ने कहा कि उनकी छोटी सी पार्टी ने देश की राजनीति बदल दी। जेल में सोचने का वक्त मिला। मैंने जेल से एक ही पत्र लिखा था वो भी एलजी साहब को, 15 अगस्त था, स्वाधीनता दिवस के अवसर पर सीएम झंडा फहराते हैं। मैंने कहा कि आतिशी जी को झंडा फहराने की इजाजत दी गई। वो चिी मुझे वापस कर दी गई और मुझे वार्निंग दी गई कि दूसरी बार अगर चिी लिखी तो आपको परिवार से भी मुलाकात भी नहीं करने दी जाएगी।
पार्टी विधायक नया मुख्यमंत्री चुनेंगे
केजरीवाल ने कहा कि भाजपा ने मुझ पर बेईमानी, भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं, अब जनता की अदालत में मेरी ईमानदारी का फैसला होगा। दो-तीन दिन में विधायकों की बैठक में नया सीएम चुना जाएगा। चुनाव तक मैं मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नहीं बैठूंगा। केजरीवाल ने कहा कि मनीष सिसोदिया पर भी वही आरोप हैं, जो मुझ पर हैं। उनका भी यही सोचना है कि वे भी पद पर नहीं रहेंगे, चुनाव जीतने के बाद ही पद संभालेंगे।
सुप्रीम कोर्ट की शर्तों से विवश हुए केजरीवाल
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने जमानत की रिहाई की शर्त के रूप में मुख्यमंत्री कार्यालय में प्रवेश करने एवं किसी भी आधिकारिक फाइल पर हस्ताक्षर करने पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने भले ही अरविंद केजरीवाल को जमानत पर रिहा कर दिया है, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से पंगु भी बना दिया है। अरविंद केजरीवाल की सरकार पूरी तरह से राजनीतिक और संवैधानिक संकट में फंस गयी और इस संवैधानिक संकट से निकलने के लिए और सरकार को बचाने के लिए अरविंद केजरीवाल ने यह ट्रंप कार्ड चला है। उन्होंने अपने भाषण में भी सुप्रीम कोर्ट की शर्त का जिक्र किया है और कहा है कि लोगों को ऐसा लगता है कि वह सीएम के रूप काम नहीं कर पाएंगे और इसलिए उन्होंने जनता की अदालत में जाने का फैसला किया है। दूसरी ओर, चूंकि अरविंद केजरीवाल कोई सरकारी फाइल पर हस्ताक्षर नहीं कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में वह विधानसभा का सत्र बुलाने के लिए उपराज्यपाल को सिफारिश भी नहीं भेज सकते हैं।

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