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इन्दौर। अपने पति को छोड़कर बेटे के साथ मुस्लिम युवक के साथ रहने वाली महिला सहित तीन आरोपियों को जिला न्यायालय ने दस-दस वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाते साठ हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। महिला ने मुस्लिम युवक के साथ रहते अपने बेटे का मतांतरण भी करवा दिया था। जिस मुस्लिम व्यक्ति के साथ वह रह रही थी, उसने ही महिला के साथ मिलकर बच्चे का मतांतरण करवाया और उसकी परवरिश मुस्लिम धर्म के हिसाब से करते हुए महिला और उसके बेटे का नाम भी बदल दिया। यही नहीं उसने एक अन्य व्यक्ति के साथ मिलकर खुद को बच्चे का पिता बताते हुए फर्जी दस्तावेज भी तैयार कर लिए थे। अभियोजन कहानी संक्षेप में इस प्रकार है कि 15 जुलाई 2023 को एक व्यक्ति ने पुलिस थाने में आवेदन देकर बताया था कि उसका विवाह हिंदू रीति-रिवाज से 30 जून 2014 को प्रार्थना नामक महिला से हुआ था। 20 जुलाई 2015 को उनको एक बेटा हुआ। 25 फरवरी 2018 को वह पत्नी और बेटे के साथ शाजापुर से लौट रहा था तब रास्ते में उसकी पत्नी और बेटा गायब हो गए। इस पर उसने पुलिस थाने में दोनों की गुमशुदगी दर्ज कराई। वर्ष 2023 में उसको पता चला कि इलियास कुरैशी उसकी पत्नी व बच्चे के साथ खजराना क्षेत्र में रह रहा है। इलियास ने उसके बच्चे को अवैधानिक तरीके से यह जानते हुए कि वह जैन धर्म का है, उसका जबर्दस्ती खतना भी करवा दिया है। इस दौरान उसको यह भी पता चला कि इलियास ने उसके बेटे का नाम बदलकर मुस्लिम धर्म के हिसाब से रख उसके जन्म प्रमाण-पत्र में कूटरचना कर खुद को उसका फर्जी पिता बताकर स्कूल में उसका प्रवेश भी करवा दिया है। इस पर पुलिस ने आरोपित इलियास और प्रार्थना शिवहरे के खिलाफ धारा 420, 467, 468,471 भादस, धारा 5 धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश 2020 के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस जांच में फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले आरोपित मोहम्मद जफर अली का भी पता चला जिस पर पुलिस ने उसे भी आरोपी बनाया और विवेचना रिपोर्ट के साथ चालान कोर्ट में पेश किया।

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