
गुना | परिवहन आयुक्त एवं कलेक्टर के निर्देशानुसार परिवहन विभाग द्वारा फतेहगढ़ चौराहा, गुना में विशेष जांच अभियान चलाया गया। इस दौरान परिवहन उडऩदस्ता एवं कार्यालय स्टाफ ने कुल 20 यात्री बसों की जांच की। इस कार्रवाई में बिना परमिट और टैक्स बकाया वाली बसों पर सख्त कार्रवाई की गई। बिना परमिट पाई गई बस क्रमांक एमपी 08-8967 प्रियंका बस से 38,800 रुपये का जुर्माना वसूला गया, जबकि एमपी 08-1655 किरार बस और एमपी 08-0507 कमला बस को टैक्स बकाया और आवश्यक दस्तावेज अधूरे होने के कारण परिवहन कार्यालय में जब्त किया गया। इन बसों से कुल 3,65,800 रुपये की वसूली की जानी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में नियमों की अनदेखी, मनमानी बस सेवाएं
हालांकि, परिवहन विभाग की यह कार्रवाई शहरी इलाकों तक ही सीमित नजर आती है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में बसों की मनमानी बदस्तूर जारी है। कई गांवों तक जाने वाली बसें पूरी तरह नियमों को ताक पर रखकर चल रही हैं। इनमें से अधिकांश बसें बिना परमिट, बिना बीमा और बिना फिटनेस प्रमाणपत्र के ही यात्रियों को ढो रही हैं। इसके बावजूद परिवहन विभाग की कार्रवाई कभी-कभार औपचारिकता के रूप में ही दिखती है। ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाली कई बसों की हालत जर्जर हो चुकी है। इन बसों में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर कोई जरूरी संसाधन नहीं होते। कई बसों में सिर्फ एक ही गेट होता है, जिससे आपातकालीन स्थिति में यात्रियों को बाहर निकलने में भारी परेशानी हो सकती है। कई बसों में तो अग्निशमन यंत्र भी नहीं होते, जिससे दुर्घटना की स्थिति में यात्रियों की जान को गंभीर खतरा बना रहता है।
ओवरलोडिंग बनी जानलेवा समस्या
शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक ओवरलोडिंग एक गंभीर समस्या बनी हुई है। बसें अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा यात्रियों को ठूंस-ठूंसकर भर रही हैं, जिससे हादसों की आशंका बढ़ जाती है। बस मालिक और चालक मनमाना किराया वसूलते हैं, जबकि परिवहन विभाग इस ओर कोई विशेष ध्यान नहीं देता। कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाती है और जब कोई बड़ी दुर्घटना होती है, तब प्रशासन सक्रिय होता है।
कार्रवाई की बजाय ठोस सुधार की जरूरत
परिवहन विभाग की छिटपुट चालानी कार्रवाई से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। जरूरत इस बात की है कि विभाग नियमित रूप से सभी बसों की जांच करे और बिना परमिट, टैक्स बकाया और ओवरलोडिंग करने वाली बसों के खिलाफ सख्त कदम उठाए। साथ ही, यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बसों में जरूरी संसाधन, जैसे- दो गेट, अग्निशमन यंत्र और फिटनेस प्रमाणपत्र को अनिवार्य रूप से लागू किया जाए। यात्री सुरक्षा और परिवहन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभाग को अपनी कार्रवाई को औपचारिकता से हटाकर ठोस सुधार की दिशा में बढ़ाना होगा। वरना, जब तक कोई बड़ी दुर्घटना नहीं होती, तब तक परिवहन नियमों की अनदेखी और यात्रियों की जान के साथ खिलवाड़ जारी रहेगा।
