
53 तरह के पेड़ काटने की मंजूरी का नोटिफिकेशन रद्द
हाईकोर्ट ने की तल्ख टिप्पणी के साथ सुनाया फैसला
जबलपुर। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत की अध्यक्षता वाली लार्जर बैंच ने 53 तरह के पेड़ों की कटाई की अनुमति देने वाला नोटिफिकेशन रद्द कर दिया है। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की है कि जैसे पुष्पा फिल्म में तस्कर, विधायक व अधिकारी सिंडिकेट चलाते हैं। मध्यप्रदेश में भी ठीक उसी तरह की स्थिति है।
इंदौर निवासी विवेक कुमार शर्मा द्वारा दायर की गई याचिका में इस नोटिफिकेशन को चुनौती दी गई थी| वर्ष 2019 में दायर इस याचिका में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मामले पर 9 जनवरी 2025 को सुनवाई करते हुए फैसला रिजर्व रखा लिया था। याचिका पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सहित हाईकोर्ट के 3 जजों की लार्जर बैंच ने मध्यप्रदेश में जंगलों की अवैध कटाई को लेकर सरकार की नीतियों को आड़े हाथों लिया। हाईकोर्ट ने 24 सितंबर 2019 को जारी वो नोटिफिकेशन भी रद्द कर दिया है, जिसमें सरकार ने 53 तरह के पेड़ों की कटाई और उनकी लकडिय़ों के परिवहन को सरकारी अनुमति से छूट दे दी थी। मामले पर कोर्ट ने 100 पन्नों का फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में साल 2019 में इंदौर के सीसीएफ द्वारा पीसीसीएफ को लिखे गए पत्र का भी हवाला दिया है। जिसमें कहा गया था कि 53 तरह के पेड़ों को कटाई की छूट देने से जंगलों में तेजी से कटाई हो रही है। जो वन भूमि को बंजर कर देगी। विवेक कुमार शर्मा सहित कई लोगों ने यह याचिका दायर की थी। कोर्ट ने कहा कि पुष्पा फिल्म में तस्करों व व्यापारियों का सिंडिकेट इतना दबदबा बनाने लगता है जिससे पुलिस, वन विभाग व विधायकों तक सरकार का कोई भी हिस्सा इससे अछूता नहीं रह पाता। हाईकोर्ट ने सुनवाई में कहा कि ये दिखाता है कि कैसे अवैध लकड़ी का व्यापार करने वाले माफिया घने जंगलों में घुस सकते हैं। सरकारी मशीनरी से मिलीभगत करके जंगलों की संपदा को लूट सकते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि कार्यपालिका भी ऐसे सिंडिकेट के आगे झुक जाती है। मध्यप्रदेश में भी यही स्थिति है। सरकार जंगलों की ट्रस्टी और संरक्षक होती है। ऐसे में जंगलों की सुरक्षा करना उसकी जिम्मेदारी है।
