
विधानसभा में मंडला एनकाउंटर पर नारेबाजी, वॉक आउट, कांग्रेस बोली
भोपाल । मप्र विधानसभा के बजट सत्र के छठवें दिन मंगलवार को सदन में विपक्षी सदस्यों ने मंडला नक्सली एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए कहा कि पुलिस ने अपना टारगेट पूरा करने के लिए आदिवासी की हत्या की है। रिटायर्ड जज से इसकी जांच कराई जानी चाहिए।
इस पर मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि मामले की 11 बिंदुओं पर मजिस्ट्रेट जांच चल रही है। जवानों ने पहले आत्मसमर्पण के लिए कहा था। आत्म समर्पण करने के बजाय पुलिस पार्टी पर फायरिंग की गई। इसके बाद ही जवाबी एक्शन लिया गया। मंत्री के इस जवाब पर कांग्रेस विधायकों ने हंगामा शुरू कर दिया। सरकार के खिलाफ नारेबाजी की, फिर कार्यवाही से वॉक आउट कर दिया।
11 बिंदुओं पर मजिस्ट्रेट जांच चल रही
मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि मामले की 11 बिंदुओं पर मजिस्ट्रेट जांच चल रही है। जवानों ने पहले आत्मसमर्पण के लिए कहा था। आत्म समर्पण करने के बजाय पुलिस पार्टी पर फायरिंग की गई। इसके बाद ही जवाबी एक्शन लिया गया। सिंघार ने कहा कि पीडि़त परिवार के सदस्य को नौकरी और 2 करोड़ रुपए की राशि मदद के तौर पर सरकार की ओर से दी जानी चाहिए। मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री ने इस मामले में मदद के लिए कहा है। सभी योजनाओं का लाभ दिया जाएगा। इस पर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री ने 10 लाख की सहायता की घोषणा कर दी, संसदीय कार्य मंत्री और गृह राज्यमंत्री कह रहे हैं कि मारा गया आदिवासी नक्सली है।
नक्सली कनेक्शन नहीं मिला तो एक करोड़ देंगे
कांग्रेस पक्ष की ओर से पीडि़त परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और एक करोड़ रुपए की सहायता राशि देने की मांग रखी। इस पर सदन में घोषणा की गई थी जांच में यदि नक्सली कनेक्शन नहीं पाया जाता है, तो परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और एक करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
आसंदी के पास आकर की नारेबाजी
इस घोषणा के बाद भी कांग्रेस के सभी विधायक आसंदी के समक्ष आकर नारेबाजी करने लगे और फिर कुछ देर बाद बहिर्गमन कर दिया। इधर भाजपा विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाहा ने बिजली विभाग के अधिकारियों पर करोड़ों रुपए के घोटाले का आरोप लगाया। ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने सदन में कहा कि उच्च स्तरीय जांच कराएंगे और संबंधित अधिकारी को 31 मार्च के बाद हटा दिया जाएगा।
