
दमोह : दमोह के सिनेमैटोग्राफर हरीश पटैल ने दमोह के स्वच्छता अभियान को लेकर एक गीत “मत करो ना यार” का निर्माण किया है, आज कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में गीत का लोकापर्ण किया। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक श्रुतकीर्ति सोमवंशी, वनमण्डलाधिकारी ईश्वर जरांडे, सीईओ जिला पंचायत प्रवीण फुलपगारे सहित सम्मानीय मीडियाजन मौजूद थे। इस अवसर पर कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने कहा यह गीत दमोह वासियों के द्वारा ही बनाया गया है, दमोह वासियों के द्वारा ही लॉन्च किया गया है, हरीश पटेल जो दमोह के प्रख्यात सिनेमैटोग्राफर है, वह बम्बई में काम करते हैं, और जब वह यहाँ पर आए थे पिछले पॉच महीने पहले । तब उन्होंने इस बात का बीड़ा उठाया था कि वह स्वच्छ शहर बनाने के लिए, दमोह को स्वच्छ जिला बनाने के लिए वह अपनी तरफ से पूरा योगदान देगें।
कलेक्टर श्री कोचर ने कहा श्री हरीश पटैल ने अपनी एक टीम खड़ी की, उन्होंने गीत लिखा, उसका पूरा कोरियोग्राफ, सिनेमैटोग्राफी, फोटोग्राफी खुद की और इसको निशुल्क किया। उन्होंने यह गीत नगरपालिका को और दमोह की जनता को समर्पित किया है। श्री कोचर ने हरीश पटैल को धन्यवाद और बधाई देते हुये कहा मुझे लगता है कि यह दमोह का थीम सॉन्ग साबित होगा। कल से हम इसको सभी कचरा गाड़ियों के साथ इसको इंट्रोड्यूस कर रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया चैनल्स पर आग्रह किया है, कि वह भी अपने अपने स्तर पर इस गीत को चलाएं। स्वच्छ भारत सर्वेक्षण अब चल रहा है। हमारे जिले में भी प्रारंभ हो चुका है, तो यह स्वच्छता गीत, जो निशुल्क उनके द्वारा तैयार किया गया है। मुझे लगता है, लोगों के मन में स्वच्छता का भाव जगाने में मील का पत्थर साबित।
सिनेमेटोग्राफर हरीश पटेल ने कहा हमारे शहर में गंदगी बहुत है, अभी गंदगी है, और 2015 का सर्वेक्षण अभियान हुआ था, उसमें सबसे निचले पायदान पर थे। सभी लोगों ने प्रयास किया, प्रयास करते-करते-करते हम लोग अब बहुत ऊंची पायदान पर आते हुए 100 में 100 के अंदर है । अब हम चाह रहे हैं की हमारा दमोह नंबर वन बने, हमारे दमोहवासी भी चाहते हैं। इसको नंबर वॅन के पायदान पर पहुंचायें, तो एक विनम्र अपील है लोगों से, “मत करो ना यार-मत करो ना यार” एक विनम्र भाव से ये है, कि आप भी कचरा मत करो, दूसरों को भी मत करने दो और अगर आप कहीं कचरा करते हो, किसी को देख रहे हो तो उसको रोकें- टोकें उसी को लेकर “अरे” और उसी स्टाइल के साथ फिर हमने शहर को जो लोग समझते हैं, जैसे हम अपने घर को अपना समझ रहे हैं, लेकिन शहर में तो गंदगी नहीं। उसमें हमने कुछ शब्द लिखे हैं। हम अपने शहर को अगर हम घर जैसा समझेंगे तो हमें यह थीम लेकिन उम्मीद है कि सब लोग इसको पसंद करेंगे और पसंद करने के साथ जिस मकसद से गाना बनाया है उस मकसद में कामयाब होंगे।
