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ट्रायल कोर्ट से बरी होने के बाद हाइकोर्ट ने दिए आदेश
इन्दौर। उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की एकल पीठ ने बलात्कार के आरोप में दर्ज रिपोर्ट और विभागीय जांच के बाद बर्खास्त हुए सब इंस्पेक्टर गोकुल सिंह को पुनः सेवा में बहाल करने के आदेश दिए हैं। हाइकोर्ट ने सब इंस्पेक्टर की याचिका स्वीकार करते हुए सब इंस्पेक्टर को बर्खास्त करने के आदेश को निरस्त करते हुए उसे सेवा में बहाल करने के निर्देश दिए। सब इंस्पेक्टर गोकुल सिंह पर विभाग की ही एक महिला कांस्टेबल ने रेप के मामले में रिपोर्ट दर्ज कराई थी जिस पर विभागीय जांच के बाद उन्हें बर्खास्त कर दिया गया था। मामले में सुनवाई के बाद रेप के आरोप से गोकुल सिंह को ट्रायल कोर्ट ने बरी कर दिया था। हाइकोर्ट में सब इंस्पेक्टर गोकुल सिंह की और से प्रकरण पैरवी एडवोकेट मनोज मानव ने करते कोर्ट के समक्ष तर्क रखते हुए कहा कि एक जैसे आरोप में यदि विभागीय जांच और कोर्ट केस दोनो चल रहे हो तो कोर्ट के फैसले को मान्य किया जाएगा। इस संबंध में एड्वोकेट मानव ने सुप्रीम कोर्ट के कुछ न्याय दृष्टांत भी पेश किए। प्रकरण कहानी संक्षेप में इस प्रकार है कि सब इंस्पेक्टर गोकुल सिंह के खिलाफ महिला कांस्टेबल की शिकायत पर विभागीय जांच आदेशित हुई थी। इसमें आरोप था कि उक्त सब इंस्पेक्टर ने उसके साथ संबंध बनाए और मारपीट की जिसके बाद सब इंस्पेक्टर गोकुल सिंह के विरुद्ध रेप, मारपीट, धमकाने का केस दर्ज किया गया था। विभाग द्वारा विभागीय जांच में सब इंस्पेक्टर को दोषी ठहरा दंडित करते हुए सेवा से पृथक कर दिया गया था। इस आदेश के विरुद्ध सब इंस्पेक्टर गोकुल सिंह ने आईजी के समक्ष अपील की थी जो खारिज हो गई थी। इसी दौरान आरोपी सब इंस्पेक्टर गोकुल सिंह ट्रायल कोर्ट से बरी हो गया। इसे लेकर उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सेवा से पृथक करने के आदेश को चुनौती दी। जिस पर सुनवाई करते सक्षम न्यायालय ने उन्हें बहाल करने के आदेश दे दिए।

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