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ओबीसी आरक्षण में अपने ही आदेश का पालन क्यों नहीं
जबलपुर। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत और विवेक जैन की युगलपीठ द्वारा शिक्षक भर्ती में होल्ड अभ्यर्थियों द्वारा दायर याचिकाओं की गुरुवार को विस्तृत सुनवाई की गई। इस दौरान सरकार से पूछा गया कि वह ओबीसी आरक्षण को लेकर अपने ही आदेश का पालन क्यों नहीं कर रही है। साथ ही इस सवाल का जवाब भी दिया जाए कि महाधिवक्ता ने कानून के विरुद्ध 87:13 का अभिमत क्यों दिया। सुनवाई में ओबीसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर व विनायक शाह ने अवगत कराया कि शिक्षक भर्ती की द्वितीय काउंसलिंग में याचिकाकर्ताओं को सिलेक्ट करके याचिकाकर्ताओं सहित ओबीसी वर्ग के एक हजार से अधिक अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी नहीं किए गए हैं। ना ही लिखित में कोई कारण बताया गया है।
जब अभ्यर्थियों ने कारण जानना चाहा तो डीपीआई ने सूचना अधिकार के तहत बताया कि याचिका में पारित अंतरिम आदेश 4 अगस्त 2023 के कारण संबंधितों को नियुक्ति आदेश जारी नहीं किए गए हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि उक्त याचिका हाई कोर्ट द्वारा निरस्त की जा चुकी है, फिर भी सरकार द्वारा नियुक्ति पत्र जारी नहीं किए गए हैं, इसलिए पीडि़तों द्वारा ये याचिकाएं दायर की गईं हैं।
2019 से अब तक की भर्तियों का ब्योरा मांगा
हाईकोर्ट ने सरकार को 2019 से हुई सभी शिक्षक भर्तियों की जानकारी पेश करने का निर्देश दिया। सीनियर एडवोकेट रामेश्वर सिंह ठाकुर ने बताया कि द्वितीय काउंसलिंग में ओबीसी वर्ग के 1000 से अधिक अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी नहीं किए गए और न ही इसका कोई लिखित कारण दिया गया। महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि शिवम गौतम की याचिका में 4 मई 2022 को पारित अंतरिम आदेश के चलते ओबीसी वर्ग की नियुक्ति रुकी हुई है। इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता ने तर्क दिया कि यह याचिका हाईकोर्ट से निपटाई जा चुकी है और सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित कर दी गई, जहां कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं हुआ। बल्कि, सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने 24 फरवरी 2025 को छत्तीसगढ़ में 58त्न आरक्षण लागू करने की अनुमति दी थी। हाईकोर्ट ने महाधिवक्ता से पूछा कि जब दोनों राज्यों का मामला समान है, तो सुप्रीम कोर्ट का आदेश मध्यप्रदेश में लागू क्यों न किया जाए। महाधिवक्ता ने सरकार से निर्देश लेने के लिए समय मांगा। अंतरिम आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सेवा की सभी भर्तियों में, चाहे प्रक्रिया पूरी हो चुकी हो, ओबीसी के 13 प्रतिशत पद रिक्त रखे जाएं। ये पद याचिकाओं के निर्णय के बाद भरे जाएंगे। सरकार को 2019 से अब तक की सभी भर्तियों का पूरा ब्योरा पेश करने का निर्देश दिया गया। मामले की अगली सुनवाई 4 मई को होगी।

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