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भोपाल के पूर्व और वर्तमान तहसीलदार हाईकोर्ट में तलब
जबलपुर। हाईकोर्ट ने पंजाब नेशनल बैंक की और से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए भोपाल के एमपी नगर जोन के पूर्व और वर्तमान तहसीलदार को फटकार लगाई है। दोनों को अगली सुनवाई में उपस्थित रहने के आदेश भी दिए हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा, लगता है तहसीलदार भोपाल कलेक्टर और हाईकोर्ट से ऊपर हो गए हैं। सुनवाई हाईकोर्ट जस्टिस एके सिंह की कोर्ट में हुई।
भोपाल के पंजाब नेशनल बैंक की और से दायर याचिका में कोर्ट को बताया गया कि भोपाल के एमपी नगर जोन-1 में स्थित कान्हा कैसल होटल ने बैंक से लोन लिया था। जिसे न चुकाने पर उसे डिफॉल्टर घोषित कर दिया गया। होटल की प्रॉपर्टी के वैधानिक दस्तावेज मॉर्टगेज कराकर संचालकों ने बैंक से लोन लिया था। बैंक से लोन लेने के बाद जब किस्त जमा नहीं की गई तो बैंक ने सरफेसी एक्ट के तहत संपत्ति पर कब्जा करने कलेक्टर के समक्ष आवेदन दिया। भोपाल कलेक्टर ने बैंक के पक्ष में आदेश जारी करते हुए तहसीलदार एमपी नगर को कब्जा सुपुर्द करने के निर्देश दिए थे, लेकिन आदेश का पालन नहीं हुआ।
तहसीलदार ने आदेश का नहीं किया पालन
भोपाल कलेक्टर द्वारा जारी आदेश का एमपी नगर जोन के तहसीलदार ने पालन नहीं किया। जिसके बाद बैंक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने तहसीलदार को आदेश दिए कि 60 दिनों में बैंक को कब्जा सुपुर्द किया जाए। लेकिन तहसीलदार ने आदेश नहीं माना। जिसके बाद हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई।
दोनों तहसीलदार उपस्थित हो….
पंजाब नेशनल बैंक की तरफ से वकील कपिल दुग्गल ने कोर्ट को बताया कि पूर्व तहसीलदार सुनील वर्मा और वर्तमान तहसीलदार आलोक पारे ने कलेक्टर का आदेश नहीं माना। इतना ही नहीं इन्होंने हाईकोर्ट के आदेश की भी अवहेलना की है। हाईकोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए अगली तारिख 24 अप्रैल तय की है। साथ ही अगली सुनवाई पर पूर्व और वर्तमान तहसीलदार को भी कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए हैं।

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