रिश्तेदार साक्षी होने मात्र से विश्वसनीयता प्रभावित नहीं – न्यायाधीश

दमोह ! अपर सत्र न्यायाधीश संतोष कुमार गुप्ता द्वारा तेज एवं लापरवाही पूर्वक वाहन चालन से एक व्यक्ति की मृत्यु होने के मामले में अधीनस्थ न्यायालय से दोषी होकर दो वर्ष के सश्रम कारावास एवं पांच हजार रुपए के जुर्माने से दंडित आरोपी की अपील खारिज करते हुए उसे पांच हजार रुपए का जुर्माना सहित दो वर्ष का सश्रम कारावास भुगताए जाने का दंडादेश पारित किया है।अपील न्यायलय में म.प्र.शासन की ओर से पैरवी शासकीय अभिभाषक राजीव बद्री सिंह ठाकुर द्वारा की गई।
मामला इस प्रकार था दिनांक 9 नवंबर 2015 को शाम 4 बजे तेंदूखेड़ा रोड पर आशीष अहिरवार, गुड्डा जैन की दुकान के सामने खड़ा था, तभी तेंदूखेड़ा तरफ से ट्रक चालक सुरेंद्र विश्वकर्मा पिता रामप्रसाद (40) निवासी तेजगढ़ ने तेज गति और लापरवाही पूर्वक चलाकर आशीष को टक्कर मार दी जिससे घटनास्थल पर ही आशीष की मृत्यु हो गई पुलिस ने ट्रक चालक सुरेंद्र को गिरफ्तार कर मामला न्यायालय में प्रस्तुत किया। प्रकरण की संपूर्ण साक्ष्य पर विचार करने पश्चात एवं दोनों पक्षों के तर्क सुनने के पश्चात विचारण न्यायालय ने ट्रक चालक सुरेंद्र पिता राम प्रसाद विश्वकर्मा के द्वारा तेज और लापरवाही पूर्वक वाहन चलाकर आशीष को टक्कर मारकर मृत्यु करने का दोषी मानते हुए भादवि की धारा 304 ए का दोषी मानते हुए 2 वर्ष के सश्रम कारावास एवं पांच हजार रुपए के जुर्माना से दंडित किया। मामले की अपील अपर सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में इस आधार पर की गई कि प्रकरण में सभी साक्षी मृतक के रिश्तेदार हैं साथ ही मृतक सुनने और बोलने में असमर्थ होने से ट्रक की आवाज नहीं सुन सका इसलिए दुर्घटना में वाहन चालक की कोई गलती नहीं है। न्यायालय ने इन तर्कों के परिपेक्ष्य में माना मृतक भले ही सुनने एवं बोलने में असमर्थ था परंतु यह नहीं माना जा सकता कि ट्रक चालक की सावधानी और सतर्कता से घटा डाली जा सकती है वहां के संचालन करने की अपेक्षा सावधानी और सतर्कता कि उसे समाप्त नहीं होती है प्रकरण में भले ही सभी साक्षी मृतक के रिश्तेदार हैं इस संबंध में न्यायालय द्वारा सुप्रीम कोर्ट के न्याय दृष्टांत को निर्णय में लेख किया जिसमें माना गया है कि साक्षियों की रिश्तेदारी किसी गवाह की साक्ष्य को अविश्वसनीय मानने का आधार नहीं हो सकती परन्तु ऐसी साक्ष्य पर सावधानी पूर्वक विचार किया जाना चाहिए, रिश्तेदारी किसी भी गवाह की विश्वसनीयता प्रभावित नहीं करती है, न्यायाधीश द्वारा अधीनस्थ न्यायालय तेंदूखेड़ा द्वारा पारित निर्णय को सही मानते हुए आरोपी की अपील खारिज कर दण्डादेश भुगताएं जाने का निर्णय पारित किया।
