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साहित्यकार समागम एवं सम्मान समारोह में वक्ताओं ने साहित्य पर अपने-अपने विचार रखे

दमोह : एक मंच पर इतने बुद्धिजीवी इकट्ठे करना बहुत बड़ी उपलब्धि है, आप सभी का सानिध्य प्राप्त करके बहुत गौरवान्वित अनुभव कर रहा हूं। साहित्य समाज का दर्पण है और साहित्यकारों ने जो काम किया है,  जब देश स्वतंत्र हुआ तब साहित्यकारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही, साहित्यकारों ने जो साहित्य लिखा, जो कविताएं लिखी, उनके माध्यम से कहीं न कहीं जन-जागरण का काम हुआ। सच्चे साहित्यकार होने के नाते हम सभी का कर्तव्य भी बनता है कि जो सही बात है वही लिखें और समाज को नई दिशा दिखाने का काम करें। साहित्यकारों की बड़ी भूमिका समाज के निर्माण में हुआ करती है। यह बात प्रदेश के संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी ने स्थानीय मानस भवन में आयोजित साहित्यकार समागम एवं सम्मान समारोह को सम्बोधित करते हुये कही। इस अवसर पर राज्यमंत्री श्री लोधी ने साहित्य जगत से जुड़े लेखकों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा मंच से श्री सत्यमोहन वर्मा का शाल-फूलमाला, स्मृति चिन्ह के साथ शुभकामना संदेश भेंट किया गया। इस अवसर पर विद्वान साहित्यकार एवं वरिष्ठ गीतकार सत्यमोहन वर्मा, पूर्व विधायक अजय टंडन, डॉ.श्याम सुंदर दुबे, राजेन्द्र गट्टानी, ऋषि श्रृंगारी, डॉ.एनआर राठौर मंचासीन थे।

            संस्कृति राज्यमंत्री श्री लोधी ने सम्बोधित करते हुये कहा आज का कार्यक्रम बहुत महत्वपूर्ण कार्यक्रम है, जिसमें बुंदेलखंड के सभी साहित्यकार शामिल हुए हैं, जिन्हें मंच के माध्यम से सम्मानित करने का काम किया गया। साहित्य क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए कहीं ना कहीं हमें अपनी युवा पीढ़ी के अंदर साहित्य पढ़ने की प्रवृत्ति जगानी पड़ेगी, क्योंकि आज की युवा पीढ़ी है कहीं ना कहीं अच्छी पुस्तक पढ़ने से, अच्छा साहित्य पढ़ने से वंचित होती जा रही है। आज की युवा पीढ़ी इंटरनेट पर व्यस्त है, जो संस्कार युवा पीढ़ी को मिलने चाहिए वह उन्हें मिल नहीं पा रहे हैं। हमें अपनी युवा पीढ़ी को अच्छा साहित्य पढ़ने और लिखने के लिए प्रेरित करना पड़ेगा, तो निश्चित रूप से साहित्य के क्षेत्र में हम आगे बढ़ेंगे।

            राज्यमंत्री श्री लोधी ने कहा बुंदेलखंड में भी बहुत सारा साहित्य लिखा गया है आने वाले समय में बुंदेलखंड के साहित्य को इकट्ठा करने का काम किया जायेगा और जो साहित्यकार है उनका सम्मान ऐसे ही एक जगह बुलाकर कर किया जा सके आगे संस्कृति विभाग इसकी रचना योजना भी बनाएगा। उन्होंने ठाकुर अमर सिंह राजपूत को बधाई देते हुये कहा उन्होंने बहुत अच्छा आयोजन किया है। इस आयोजन में समस्त साहित्यकारों, कवियों और लेखकों को आमंत्रित किया है।पूर्व विधायक अजय टंडन ने कहा मैं इस लायक नहीं था जो मुझे मंच पर विराजमान किया गया, मंच के नीचे वह सभी लोग बैठे हैं, जिनसे हमने कुछ सीखा है और कुछ करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा ना हमने कोई पुस्तक लिखी है, ना कोई कविता पड़ी, ना ही ऐसा कोई कार्य किया है कि इतना बड़ा मंच मिल सके। दमोह के जितने साहित्यकार हैं आप सभी को धन्यवाद देता हूं कि आप लोगों की वजह से आज दमोह में साहित्य जिंदा है, आप सभी बधाई के पात्र हैं।

            विद्वान साहित्यकार एवं वरिष्ठ गीतकार श्री सत्यमोहन वर्मा ने कहा यह मेरा सम्मान नहीं है, यह हिंदी का सम्मान है, हिंदी साहित्य का सम्मान है और आप सभी का सम्मान है, जिन्होंने विशिष्ट अवसर पर उपस्थित होकर हिंदी सेवा की भावना को प्रदर्शित किया है, उसे सुदृढ़ किया है और उसे शक्ति प्रदान की है। उन्होंने सभी को हृदय से धन्यवाद दिया।पूर्व निर्देशक मुक्ति बोध सृजनापीठ केन्द्रीय विश्वविद्यालय सागर डॉ. श्याम सुंदर दुबे ने कहा यह कार्यक्रम मध्य प्रदेश लेखक संघ के द्वारा आयोजित हो रहा है, मेरे जीवन के इतिहास में संभवत: यह पहला कार्यक्रम है, जो मध्य प्रदेश लेखक संघ प्रांतीय कार्यक्रम के रूप में यहां दमोह में आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा अभी तक कोई भी प्रांतीय सम्मेलन इस भूमि पर नहीं हुआ है।इस अवसर पर ठाकुर नारायण सिंह, डॉ रघुनंदन चिल्ले सहित अन्य वक्ताओं ने सहित्य विषय पर अपनी-अपनी बात रखी। कार्यक्रम का संचालन ठाकुर अमर सिंह राजपूत ने किया।इस दौरान विद्यासागर पाण्डे, नरेन्द्र दुबे, नरेन्द्र बजाज, राजेन्द्र गुरू, ठा. नन्हें सिंह, डॉ.पुष्पा चिले, डॉ.प्रेमलता नीलम सहित साहित्य जगत से जुड़े गणमान्य नागरिक सहित सम्मानीय मीडियाजन मौजूद रहे।

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