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निगम पर लगाए वित्तीय अनियमित्ताओं के आरोप
जबलपुर। नगर निगम जबलपुर में जहां आमजनता से जुड़े विकास कार्य यह कह कर रोके जा रहे हैं कि पैसा नहीं है. वहीं दूसरे तरफ नगर निगम में घोटालों की नया इतिहास बनाया जा रहा है. आज नगर निगम जबलपुर में एक नये तरह का घोटाला चल रहा है. जहां कंसल्टेंसी, रिसर्च, विशेषज्ञ नियुक्त करने, प्रोफेनल्स से सलाह लेने की आड़ में करोड़ों का घोटाला किया जा रहा है. यह बात नेता प्रतिपक्ष अमरीष मिश्रा ने बुधवार को आयोजित पत्रकारवार्ता में कही. इस दौरान उपनेता प्रतिपक्ष शगुफ्ता गुड्डू उस्मानी, सचेतक आयोध्या तिवारी सहित सभी कांग्रेस पार्षद उपस्थित रहे. श्री मिश्रा ने कहा इस मामले में अब कांग्रेस पार्षद दल ईओडब्लू में साक्ष्यों के साथ शिकायत करेगा. साथ ही जनता के पैसों के साथ हो रही इस होली के खिलाफ सड़क पर आंदोलन शुरु करेगा.
नेता प्रतिपक्ष अमरीष मिश्रा ने कहा, नगर निगम पूरी बेशर्मी के साथ जनता के पैसों की होली खेली जा रही है. कभी नगर निगम जबलपुर में वायु प्रदूषण के स्त्रोत का पता लगाने के लिये एजेंसी नियुक्त करती है. फिर उस एजेंसी और विशेष को 37 लाख 55 हजार रुपये भुगतान कर देती है. लेकिन उस एजेंसी ने किया रिसर्च की क्या एनालिसिस किया, उसने क्या रिपोर्ट दी, रिपोर्ट पर एक्शन लिया गया. कुछ भी जानकारी उपलब्ध नहीं दी जा रही है. फिर इंफार्मेशन सिस्टम मैनेजमेंट के नाम पर एआईएस विशेषज्ञ की नियुक्ति की जाती है, उसे 64 लाख रुपये भुगतान किया जाता है. विशेषज्ञ का कार्य बताया जाता है कि वो नगर निगम के डेटा का एनालिसिस करके रिपोर्ट देगा जिससे निगम का कार्य बेहतर होगा. लेकिन क्या एनालिसिस हुआ, क्या रिपोर्ट आई, क्या एक्शन हुआ. नगर निगम के अधिकारी कोई जानकारी नहीं देते हैं.
3 करोड़ का सिस्टम लापता…
श्री मिश्रा ने कहा, इसी प्रकार सूचना विज्ञान केन्द्र को ई गवर्नेंस के लिये आईटी समाधान की रिपोर्ट देने के लिये 83 लाख 45 हजार रुपये भुगतान कर दिये गये. एयर क्लाविटी मानिटरिंग सिस्टम के नाम पर 3 करोड़ खर्च कर दिये गये. लेकिन इस सिस्टम की कोई जानकारी अधिकारी देने तैयार नहीं हैं कि सिस्टम कहा लगा है, क्या और कैसे काम कर रहा है.
सुधार रिपेयरिंग के नाम पर लूट जारी…
सचेतक आयोध्या तिवारी ने कहा, सिर्फ वित्तीय वर्ष 23-24 में जल विभाग ने रिपेयरिंग और सुधार कार्य पर 62 करोड़ 81 खर्च दिखाया. वहीं 24-25 में 41 करोड़ 4 लाख खर्च किया गया. लेकिन जमीनी स्थिति यह है की न रिपेयरिंग हुई है न लाईन का पूरा सुधार कार्य हुआ है. वर्ष 23-24 में 2 करोड़ 34 लाख रुपये सिर्फ कुओं की सफाई पर खर्च किये गये. हाल यह है कि शहर में मौजूद 80 फीसदी कुओं में खानापूर्ति की सफाई भी नहीं की गई. उन्होंने कहा शहर की एयर क्वालिटी सुधारने के लिये 1 करोड़ 77 लाख का फंड निगम का मिला, वो पैसा सलाह लेने के नाम पर सलाहकारों पर लुटा दिया गया है. उन्होंने कहा नगर निगम इतिहास का सबसे बड़ा और चौकाने वाला घोटाला चल रहा है.

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