

सरकार और निगम पर लगाया घोटालेबाजों को बचाने का आरोप
इन्दौर । कांग्रेस ने आज संभाग आयुक्त कार्यालय का घेराव कर इंदौर नगर निगम में हुए करोड़ों रुपए के घोटाले के दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार और नगर निगम की भाजपा की परिषद के द्वारा घोटाला करने वालों को बचाया जा रहा है। इंदौर शहर कांग्रेस कमेटी, इंदौर जिला कांग्रेस कमेटी और कांग्रेस पार्षद दल के द्वारा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी एवं पूर्व मंत्री सज्जन सिंग वर्मा के नेतृत्व में आज संभागआयुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन में प्रमुख रूप से पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, सत्य नारायण पटेल,नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे, सुरजीत सिंह चड्ढा, सदाशिव यादव , कांग्रेस पार्षद गण शामिल हुए बड़ी संख्या में एकत्र हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं के द्वारा जमकर नारेबाजी की गई। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कहा कि शहर के नागरिकों के द्वारा टैक्स के रूप में जो पैसा नगर निगम में दिया जा रहा है उस पैसे को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ाया जा रहा है। प्रदर्शन उपरांत संभाग आयुक्त के नाम सोपे गए ज्ञापन में कांग्रेस के द्वारा कहा गया कि पिछले 10 महीने से इंदौर नगर निगम में एक के बाद एक ड्रेनेज के कार्य से जुड़े घोटाले सामने आ रहे हैं। पूर्व में नगर निगम में फर्जी फाइल घोटाला सामने आया था। इस घोटाले में 1000 करोड रुपए का फर्जी हस्ताक्षर कर भुगतान जारी करवाने का मामला सामने आया था। इसमें पुलिस के द्वारा प्रकरण दर्ज करते हुए कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। हाल ही में 11 करोड़ रुपए की फर्जी फाइल का एक और मामला सामने आया है। यह कोई नई बात नहीं है। इस तरह के मामले इंदौर नगर निगम में लगातार सामने आ रहे हैं ।नगर निगम के द्वारा नालों की सफाई और नालों को चैनेलाइजेशन करने के काम पर 20000 करोड रुपए अब तक खर्च किए जा चुके हैं। खर्च का कोई हिसाब नहीं है। जो काम कथित तौर पर नगर निगम के द्वारा किया गया वह काम पानी में बह चुका है। इस समय पूरा शहर सीवरेज की समस्याओं से दो दो हाथ करता हुआ नजर आ रहा है।
कांग्रेस ने कहा है कि उपरोक्त स्थिति में यह आवश्यक है कि नगर निगम में हुए फर्जी फाइल घोटाले और ड्रेनेज घोटाले की निष्पक्ष जांच कराई जाएं। इस घोटाले में शामिल नगर निगम के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएं। राज्य सरकार के द्वारा जांच के लिए गठित की गई उच्च स्तरीय समिति से इसका प्रतिवेदन मांगा जाए और उस प्रतिवेदन के आधार पर भी कार्रवाई की जाए।
