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सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया, याचिका की खारिज
भोपाल। बहुचर्चित ओबीसी आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट दिल्ली में सुनवाई हुई। सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कोई नहीं हुआ हाजिर, लिहाजा कमलनाथ सरकार द्वारा साल 2019 में ओबीसी वर्ग को 14 फीसदी से बढ़ाकर 27 प्रतिशत आरक्षण देने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लगाई गई विशेष अनुमति याचिका खारिज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण पर कोई रोक नहीं हैं। यूथ फॉर इक्वेलिटीसंगठन की ओर से सुप्रीम कोर्ट में यह एसएलपी दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने मप्र हाईकोर्ट के आदेश को सही मानते हुए स्पष्ट किया कि 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण को लागू करने में कोई न्यायिक अड़चन नहीं हैं।
बता दें कि इससे पहले हाइकोर्ट भी खारिज यूथ फॉर इक्वलिटी की याचिका कर चुका है। 28 जनवरी को हाईकोर्ट ने यूथ फॉर इक्वलिटी की दो याचिका खारिज की थी। यूथ फॉर इक्वलिटी की याचिका में ओबीसी के 27 प्रतिशत आरक्षण भर्ती के सर्कुलर को चैलेंज किया गया था। यूथ फॉर इक्वलिटी की याचिका खारिज होने के बाद मप्र में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का रास्ता साफ हो रहा था। हाईकोर्ट से ओबीसी आरक्षण का रास्ता साफ होता देख सुप्रीम कोर्ट में अड़ंगा लगाने कोशिश की गई थी। ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन सहित प्रभावित अभ्यर्थियों की ओर से केवियट दाखिल की गईं थी। जानकारी रामेश्वर सिंह ठाकुर, याचिकाकर्ताओं के वकील ने दी।
27 फीसदी ओबीसी आरक्षण में कोई अड़चन नहीं
महासभा के राष्ट्रीय कोर कमेटी सदस्य और एडवोकेट धर्मेंद्र सिंह कुशवाहा ने बताया कि 26 फरवरी 2025 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर के मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैथ और न्यायाधीश विवेक जैन की संयुक्त बेंच ने 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के कानून का पालन करने का आदेश देते हुए कहा था कि 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण पर किसी प्रकार की रोक नहीं है। ऐसे में याचिका आज तक किस प्रकार से चल रही है। इसको देखते हुए हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की थी। उस आदेश के खिलाफ यूथ फॉर इक्वेलिटी संगठन के द्वारा सुप्रीम कोर्ट दिल्ली में एसएलपी दायर की गई थी। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर 8 में न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति राजेश बिंदल ने 22वें नंबर पर इस एसएलपी की सुनवाई की। ओबीसी महासभा की ओर से एडवोकेट वरुण ठाकुर एवं एडवोकेट रामकरण के माध्यम से न्यायालय के सामने पक्ष रखा गया।
सरकार ने कोर्ट में मजबूती से पक्ष नहीं रखा
धर्मेंद्र कुशवाहा ने कहा कि आज हुई सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में मजबूती से पक्ष नहीं रखा गया। इससे जाहिर होता है कि मध्य प्रदेश की सरकार पिछड़े वर्ग को उनका अधिकार देना नहीं चाहती। ऐसी दशा में ओबीसी महासभा ने अपने वर्ग को न्याय दिलाने के लिए संगठन की ओर से अपने वर्ग से एक-एक रुपए इक_ा करके सुप्रीम कोर्ट में अपने वकीलों से पैरवी कराई। जिसके कारण आज यूथ फॉर इक्वेलिटी संगठन की याचिका खारिज हुई ।

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