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भोपाल का फर्जी कॉल सेंटर मामला
भोपाल। राजधानी भोपाल के ऐशबाग थाना इलाके में स्थित एक बिल्डिंग में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर के भंडाफोड़ मामले में तीसरे आरोपी पुलिसकर्मी को भी कोर्ट ने जमानत दे दी है। आरोपी पुलिस कर्मियों पर फर्जी कॉल सेंटर के आरोपियों को बचाने के लिए रिश्वत लेने के आरोप लगे है।मामले में गुरुवार को विशेष न्यायधीश आरपी मिश्रा की कोर्ट ने आरोपी एएसआई मनोज सिंह को जमानत दे दी है। आरोपी को समानता के अधिकार का लाभ दिया गया है। कोर्ट ने आदेश में लिखा कि मामले के अन्य आरोपी टीआई जीतेंद्र गढ़वाल और प्रधान आरक्षक धर्मेंद्र सिंह को पूर्व में इस केस में जमानत दी जा चुकी है। इन दोनों आरोपियों पर भी समान आरोप थे, जो मनोज पर हैं। लिहाजा समानता के अधिकार के तहत 50 हजार रुपए के बॉन्ड पर मनोज को जमानत दी जाती है। वहीं केस का मुख्य आरोपी एएसआई पवन रघुवंशी, रिश्वत कांड का बिचौलिया पार्षद अंशुल जैन और रिश्वत भेजने वाला मोइन खान फरार है। एसआईटी की टीम तीनों की तलाश कर रही है। रिश्वत कांड के मुख्य आरोपी पुलिसकर्मी पवन रघुवंशी द्वारा पुलिस को दिए बयानों के मुताबिक, मामले में मुख्य आरोपी अफजल खान के साले मोइन खान, उसके भाई वसीम खान और अफजल की पत्नी जाहिदा को आरोपी न बनाने के लिए रिश्वत मांगी गई थी। टीआई जितेंद्र गढ़वाल के कहने पर पवन और साथी एएसआई मनोज सिंह, प्रधान आरक्षक धर्मेद्र सिंह ने पूरी डील की थी। रिश्वत की पहली किश्त के तौर पर 4.94 लाख रुपए 5 मार्च को पवन ने अपने घर पर फरार पार्षद अंशुल उर्फ मोना जैन से लिए थे। जानकारी लगने पर एसीपी सुरभी मीणा ने टीम के साथ पवन के घर पर रेड मारकर इस रकम को जप्त किया था।

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