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कहा – पति के समान शिक्षित और डिग्रीधारी डाक्टर को भरण पोषण दिलाना जरुरी नहीं
इन्दौर । प्रथम अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश धीरेंद्र सिंह की कोर्ट ने डाक्टर पति से भरण पोषण की मांग करने का डाक्टर पत्नी द्वारा लगाया आवेदन कोर्ट ने विश्लेषण एवं न्यायसिद्धांत के आधार पर निरस्त कर दिया। अंतरिम भरण पोषण का यह आवेदन महिला डाक्टर शिखा धाकड़ निवासी साउथ तुकोगंज इंदौर द्वारा पति डॉ. लव दुग्गड निवासी पोट्टोमल जंक्शन, कालिकट, केरल के खिलाफ भरण पोषण राशि की मांग करते हुए प्रस्तुत किया था। जिसे कोर्ट ने खारिज करते टिप्पणी की कि पति के समान डिग्रीधारी पत्नी को भरण पोषण दिलाना आवश्यक नहीं होता। आवेदन पर कोर्ट में सुनवाई के दौरान पति डॉ. लव दुग्गड की ओर से अधिवक्ता योगेश गुप्ता (जैतपुरा वाला) ने पैरवी करते मय दस्तावेजी सबूत के कोर्ट को बताया कि आवेदिका डॉ. शिखा धाकड स्वयं बी.डी.एस. एवं एम.डी.एस. चिकित्सक है। वह अपने चिकित्सकीय व्यवसाय से प्रतिमाह लाखों रुपए की आय अर्जित करती है। उसके पास इंदौर शहर में करोडों की सम्पत्ति भी है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि डॉ. लव दुग्गड द्वारा अपनी पत्नी डॉ. शिखा धाकड को खुशी-खुशी जीवन व्यतित करने के लिए 36 लाख रुपए कीमत का क्लिनिक भी बनवाया जिसमें डॉ. शिखा अपना चिकित्सा व्यवसाय करती थी। वहीं डॉ. शिखा द्वारा आय कर के प्रस्तुत दस्तावेजों अनुसार उनकी मासिक आय लगभग 71,250 रुपए है। केरल से डॉ. शिखा अपनी माता के बीमार होने का बहाना बनाकर इंदौर आई और फिर कभी लौटी ही नहीं और एक सोची समझी साजिश के तहत उसने अपने पति पर झूठे आरोप लगाकर प्रकरण प्रस्तुत किया तथा तलाक देने के लिये करोडों रूपए की मांग की। अधिवक्ताओं के तथ्यों और तर्कों से सहमत होकर कोर्ट ने अपने आदेश में उल्लेख किया गया कि उच्च शिक्षित एवं पति के समान व्यावसायिक डिग्रीधारित पत्नी को भरण पोषण राशि दिलाया जाना आवश्यक नही होता है। कोर्ट ने कहा कि प्रस्तुत प्रकरण में भी स्वंय आवेदिका अपने पति की तरह ही डिग्रीधारक है।

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