
ब्लैकलिस्ट कंपनी को ठेका देने की शिकायत
भोपाल । लोक निर्माण विभाग के प्रभारी प्रमुख अभियंता केपीएस राणा और पीआईयू के प्रभारी प्रमुख अभियंता शालिगराम बघेल ईओडब्ल्यू के शिकंजे में फंस गए हैं। एजेंसी ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच शुरू कर दी है। राणा पर आरोप हैं कि उन्होंने एनएचएआई में प्रभारी मुख्य अभियंता रहते ब्लैक लिस्टेड ठेकेदार को 38.39 करोड़ का ठेका दिलवाया, जबकि शालिगराज बघेल पर संयुक्त निविदाएं आमंत्रित करने के आरोप हैं। दोनों मामलों में ईओडब्ल्यू ने जांच शुरू कर दी है। मामला उजागर होने पर सरकार राणा को प्रमुख अभियंता पद से हटा भी सकती है।
बताया गया कि बीना टोल प्लाजा के निर्माण में काम नहीं करने के कारण राणा ने एनएचएआई में प्रभारी सीई रहते राजेंद्र सिंह किलेदार कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को एक साल के लिए ब्लैक लिस्टेड किया था, लेकिन 13 दिन बाद ही उन्होंने राजेंद्र सिंह किलेदार कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को 7.50 किलोमीटर आष्टा बायपास का 38.39 करोड़ रुपए का टेंडर दे दिया।
तत्कालीन ईएनसी की आपित्त भी दरकिनार
इस संबंध में लोनिवि के रिटायर्ड ईएनसी नरेंद्र कुमार ने आपत्ति जताते हुए पत्र लिखा था कि चयनित संविदाकार का पंजीयन 13 दिसंबर 2022 को निलंबित किए जाने के बाद इनकी दूसरी फाइनेंशियल बिड 17 दिसंबर 2022 को कैसे खोल दी। लेकिन जब यह मामला सामने आया, तब लोकसभा चुनाव की आचार संहिता प्रभावी थी, उसी दौरान दूसरी बार में ब्लैक लिस्टेड ठेकेदार का टेंडर स्वीकृत कर लिया गया।
