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पहलगाम हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के दूसरे दौरे पर पहुंचे हैं राहुल
जम्मू। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले का दौरा किया, जहाँ उन्होंने पाकिस्तानी गोलाबारी के पीड़ितों से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाया। पहलगाम आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर चलाया गया था, जिसके विरोध में नियंत्रण रेखा के पार से हुई गोलाबारी में स्थानीय लोगों के जान-माल का भारी नुकसान हुआ।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पुंछ पहुंचकर प्रभावित गांवों, शिक्षण संस्थानों, धार्मिक स्थलों और शोक संतप्त परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने एक स्कूल में जाकर बच्चों से संवाद किया और कहा, आपने बड़ा खतरा और भयावह स्थिति देखी है, लेकिन चिंता न करें, सब कुछ सामान्य हो जाएगा। पढ़ाई करें, खेलें और ढेर सारे दोस्त बनाएं। यही इस संकट से निपटने का सबसे अच्छा तरीका है।
पहलगाम हमले के बाद दूसरी बार जम्मू-कश्मीर पहुंचे राहुल गांधी ने सीमा पार से हुई गोलाबारी में नष्ट हुए घरों और सार्वजनिक संपत्तियों का भी निरीक्षण किया। इस अवसर पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने कहा कि, राहुल गांधी ने उन संस्थानों का दौरा किया जिन्हें गोलाबारी में नुकसान पहुँचा है। उन्होंने उन गुरुद्वारों और मंदिरों में भी जाने की योजना बनाई है जिन्हें पाकिस्तान की गोलीबारी से क्षति पहुँची है।
गोलीबारी के कारण हालात गंभीर
पुंछ में पाकिस्तान द्वारा की गई आर्टिलरी और मोर्टार से गोलाबारी के चलते अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है और 70 से अधिक घायल हुए हैं। हजारों लोग एलओसी से सटे गांवों से पलायन कर सरकारी राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हुए हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ा तनाव
यह गोलाबारी 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के तहत पीओके में नौ आतंकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई के बाद शुरू हुई। इस संघर्ष में चार दिन तक दोनों देशों के बीच तनाव रहा, जिसके बाद 10 मई को संघर्षविराम पर सहमति बनी।
राहुल गांधी की जम्मू-कश्मीर में सक्रियता
यह राहुल गांधी की इस महीने जम्मू-कश्मीर की दूसरी यात्रा है। इससे पहले वह 25 अप्रैल को श्रीनगर गए थे और आतंकवादी हमले में घायल हुए लोगों से मुलाकात की थी। उन्होंने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, सीएम उमर अब्दुल्ला सहित कई प्रमुख नेताओं से भी मुलाकात की थी। राहुल गांधी के इस दौरे को मानवता और साहस के प्रतीकात्मक समर्थन के रूप में देखा जा रहा है, जो कठिन परिस्थितियों में नागरिकों के साथ खड़े होने की राजनीतिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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