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:सहायक यंत्री देवेश कोठारी को योग्यता नहीं होने पर भी बनाया भवन अधिकारी, किए 250 नक्शे पास::
इन्दौर । आईएएस हर्षिका सिंह व आईएएस दिव्यांक सिंह के खिलाफ शिकायत को लोकायुक्त पुलिस इंदौर ने जांच के लिए ले लिया है। शिकायत में आरोप है कि आईएएस हर्षिका सिंह ने इन्दौर नगर निगम आयुक्त रहते तथा आईएएस दिव्यांक सिंह ने स्मार्ट सिटी सीईओ रहते सहायक यंत्री देवेश कोठारी की संविदा नियुक्ति का तथ्य छिपाकर भवन अधिकारी की योग्यता नहीं होने पर भी उन्हें नियमित भवन अधिकारी बनाया। उसके बाद कोठारी ने कई नक्शे पास किए। लोकायुक्त पुलिस ने जांच प्रकरण पूर्व पार्षद दिलीप कौशल की शिकायत पर दर्ज किया है। अब लोकायुक्त पुलिस शिकायत की विस्तृत जांच कर आगे कार्रवाई करेगा। सहायक यंत्री देवेश कोठारी का नाम भी जांच प्रकरण में शामिल है। जांच रिपोर्ट में तय होगा कि शिकायत एफआईआर दर्ज करने योग्य है अथवा नहीं। एस पी लोकायुक्त राजेश सहाय के अनुसार भोपाल स्थित मुख्यालय में शिकायत की थी, वहीं से मामले में जांच प्रकरण दर्ज किया गया है। इसके आधार पर आगे जांच की जाएगी। सबूत मिले तो प्रकरण दर्ज किया जाएगा।
पूर्व पार्षद कौशल का शिकायत में कहना है कि तत्कालीन निगमायुक्त हर्षिका सिंह व दिव्यांक सिंह को मामले की सप्रमाण जानकारी दी थी परन्तु दोनों अफसरों ने कार्रवाई नहीं की। मामले में कौशल ने बीएनएस की धारा 467, 336, 340, 61 (2), पीसी एक्ट की धारा 13 (1) (डी) तथा 13 (2) के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग सभी प्रमाणों सहित शपथ-पत्र पर की है। मप्र राज्य लोकायुक्त मुख्यालय में भी बीएनएस 2023 की धारा 173 में एफआईआर दर्ज करने का आवेदन प्रस्तुत किया गया था। दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच के बाद राज्य लोकायुक्त ने जांच प्रकरण क्रमांक 31/ई/2025 पंजीबद्ध किया है। कौशल ने अपने शिकायती आवेदन पत्र में दोनों आईएएस अफसरों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने स्मार्ट सिटी के कार्यों के लिए संविदा पर पदस्थ किए सिविल इंजीनियर को नगर निगम में नियमित भवन अधिकारी के पद की योग्यता नहीं होने के बाद भी पदस्थ किया। साथ ही इन्हें विविध प्रकार के अधिकार देकर उपकृत किया। इसके अलावा सहायक यंत्री देवेश कोठारी को संविदा सेवक होने के तथ्यों को छिपाकर भवन अधिकारी का चार्ज दिया जिसके बाद कोठारी ने भवन अधिकारी की हैसियत से लगभग 250 मानचित्र अवैध डिजिटल हस्ताक्षर से स्वीकृत किए। शिकायत में कहा गया कि नक्शे से धन कमाया। यही नहीं नियम विरूद्ध पदस्थ कोठारी द्वारा झोन क्रमांक 13 पर भवन अधिकारी की हैसियत से वास्तविक तथ्यों को छिपाकर निर्माणाधीन सैकड़ों भवनों व पूर्व से निर्मित सैकड़ों भवनों को अवैध निर्माण होने के सूचना-पत्र देकर बिल्डर्स से अवैध धन अर्जित करने के कारण किसी भी भवन से अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई नहीं की। निगमायुक्त हर्षिका सिंह और सीईओ स्मार्ट सिटी दिव्यांक सिंह को संविदा सेवक होने की जानकारी के बाद भी सहायक यंत्री कोठारी को भवन अधिकारी के पद पर पदस्थ रखा। लोकायुक्त पुलिस ने फिलहाल पूर्व पार्षद कौशल की इस शिकायत पर प्रकरण जांच में लिया है। जांच सत्यापन के बाद कोई कार्रवाई होगी।

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