
मऊ कोर्ट का फैसला लागू, विधानसभा अध्यक्ष जारी करेंगे सदस्यता रद्द होने का नोटिस
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मऊ सदर सीट से विधायक और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के नेता अब्बास अंसारी की विधायकी समाप्त कर दी गई है। मऊ की एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा हेट स्पीच मामले में उन्हें दो साल की सजा और ₹3,000 का जुर्माना सुनाए जाने के तुरंत बाद यह कार्रवाई हुई है।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) डॉ. केपी सिंह की अदालत ने अब्बास अंसारी को दोषी करार देते हुए यह फैसला सुनाया है। अदालत ने अब्बास अंसारी को भारतीय दंड संहिता की छह गंभीर धाराओं के तहत दोषी ठहराया है। इन धाराओं में आपराधिक धमकी, चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश, सरकारी कार्य में बाधा, सरकारी सेवक को धमकाना, समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाना और आपराधिक साजिश शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार सजा के बाद विधायकी स्वतः समाप्त
सुप्रीम कोर्ट के 2013 के ऐतिहासिक फैसले के अनुसार, अगर किसी सांसद या विधायक को दो साल या उससे अधिक की सजा होती है, तो उनकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8(4) को निरस्त कर यह नियम लागू किया गया था। इसी के तहत अब्बास अंसारी की विधायकी समाप्त की जा सकती है। विधानसभा सचिवालय इस बाबत औपचारिक अधिसूचना जल्द जारी कर सकता है।
क्या था मामला?
दरअसल 3 मार्च 2022 को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान मऊ के पहाड़पुर मैदान में एक जनसभा को संबोधित करते हुए अब्बास अंसारी ने सरकारी अधिकारियों को धमकाते हुए कहा था कि सरकार बनने के बाद एक-एक का हिसाब लिया जाएगा। इस बयान को भड़काऊ और प्रशासन विरोधी माना गया। उसी समय तत्कालीन सब-इंस्पेक्टर गंगाराम बिंद की शिकायत पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
सह आरोपी मंसूर अंसारी को भी सजा
इस मामले में अब्बास अंसारी के साथ सह आरोपी मंसूर अंसारी को भी दोषी पाया गया है। कोर्ट ने उन्हें छह महीने की सजा और ₹1,000 का जुर्माना सुनाया है।
अब राजनीतिक भविष्य पर सवाल
यह फैसला अब्बास अंसारी के राजनीतिक भविष्य पर बड़ा असर डाल सकता है। हालांकि उन्हें सुप्रीम कोर्ट में अपील का अधिकार है, और यदि उन्हें राहत मिलती है तो उनकी सदस्यता बहाल की जा सकती है। लेकिन फिलहाल के लिए वे विधानसभा से बाहर माने जा रहे हैं।
