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बिजली कंपनी को भारी पड़ी मनमानी

भोपाल । बिजली देयकों को लेकर विद्युत वितरण कंपनियों की मनमानी नई बात नहीं है। शिकायतों की सुनवाई नहीं करने से परेशान भोपाल के एक उपभोक्ता की शिकायत पर उपभोक्ता आयोग ने गलत बिजली बिल देने पर बिजली कंपनी को 10 हजार रुपया हर्जाना देने का आदेश दिया है। यही नहीं, उपभोक्ता को भेजा गया 42 हजार 872 रुपये का बिजली बिल भी गलत बताकर निरस्त कर दिया है।
करोंद निवासी गिरजा सक्सेना ने मध्य प्रदेश विद्युत वितरण कंपनी के खिलाफ 2020 में याचिका लगाई थी। उनका कहना था कि उन्होंने 2017 में संयोजन लिया था। जुलाई 2019 तक उनका मासिक बिजली बिल 100-150 रुपये आता रहा। वे उसका नियमित भुगतान भी करते रहे। अगस्त 2019 में कंपनी ने अचानक 7,026 रुपये का बिल भेज दिया। उन्होंने शिकायत की तो कोई सुनवाई नहीं हुई। सितंबर में उन्हें 7,019 रुपये का बिल भेज दिया गया। उन्होंने कंपनी से फिर शिकायत की उसके बाद भी बात नहीं बनी। अक्टूबर में कंपनी ने उन्हें 42 हजार 872 रुपये का बिल भेज दिया। उपभोक्ता ने उच्च स्तर पर शिकायत की तो कंपनी ने विद्युत मीटर चेक करने के लिए कहा और उनके घर नया मीटर लगाकर चले गए। नया मीटर लगने के बाद बिजली बिल 200 से 300 रुपये आने लगा, इसके बाद भी कंपनी ने बढ़े हुए बिजली बिल को समायोजित करने से इंकार कर दिया।
उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को लगाई फटकार
वहीं, कंपनी का कहना था कि वह बकाया राशि उपभोक्ता को देनी ही होगी। बिजली कंपनी ने तर्क रखा कि उपभोक्ता ने अगस्त से अक्टूबर तक 4467 यूनिट बिजली खपत की थी। मीटर को टेस्टिंग लैब भी भेजा गया था। मीटर की कार्यप्रणाली सही पाई गई है। इस कारण उपभोक्ता का बिजली बिल 42 हजार 872 रुपये आया। आयोग ने फटकार लगाते हुए कहा कि उपभोक्ता की शिकायत की सुनवाई नहीं कर कंपनी ने गलत किया है। 100-150 यूनिट बिजली खपत करने वाले मकान में चार हजार यूनिट बिजली खपत होना असामान्य है। आयोग ने विद्युत कंपनी को 42,872 रुपये की राशि को निरस्त करने का आदेश दिया। साथ ही अक्टूबर 2019 का बिल के रूप में औसत की दर से राशि वसूल करने के आदेश दिए। साथ ही उपभोक्ता को विद्युत सेवा से वंचित नहीं करें और 10 हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति राशि देने के निर्देश भी दिए।

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