जुन्नारदेव विकासखंड के स्कूलों में सबसे ज्यादा स्कूल शिक्षक विहीन
छिंदवाड़ा। माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा हाल ही में कक्षा 10वीं और 12वीं के परीक्षा परिणाम घोषित किए गए हैं। इस बार आदिवासी अंचलों के स्कूलों में परीक्षा परिणाम बेहतर आया है। कक्षा 10वीं का परीक्षा परिणाम पिछले वर्ष जहां ६२.१० प्रतिशत था। वहीं इस बार कक्षा 10वीं का परीक्षा परिणाम ८८.१७ आया है। पिछले वर्ष की तुलना में २६.०७ प्रतिशत रिजल्ट अधिक है। इसी प्रकार कक्षा 12वीं में पिछले साल जहां ६४.६२ प्रतिशत रिजल्ट आया था। वहीं इस बार ८६.४७ प्रतिशत रिजल्ट आया है। यानि कि २१.८५ प्रतिशत रिजल्ट की बढ़ोतरी हुई है। हैरानी की बात तो यह है कि जिले के आदिवासी अंचलों में शिक्षकों की भारी कमी है, इसके बावजूद भी आदिवासी बच्चे पढ़ाई करने में आगे हैं। आंकड़ों के मुताबिक जिले के ट्रायबल विकासखंडों में १४९४ शिक्षकों व्याख्याताओं की कमी है। प्राचार्य प्रथम श्रेणी पद पर ०५, द्वितीय श्रेणी प्राचार्य पद पर ४६, हाईस्कूल प्राचार्य पद पर ३२ और व्याख्याता के पद पर १५५ सीट खाली है। इसी प्रकार यदि उच्च माध्यमिक शिक्षक की बात करें तो ट्रायबल में २४७ शिक्षक कम है। ५२ प्रधान पाठक, ५३१ माध्यमिक शिक्षक, ४५८ उच्च श्रेणी शिक्षक और ८ प्राथमिक शिक्षकों की कमी है। स्वीकृत पदों के मुताबिक कुल ५६३९ पद में से १४९४ पद अब भी खाली है। सिर्फ ४१४५ पद भरे हुए हैं।
४० फीसदी स्कूलों में शिक्षकों की कमी
जिले के आदिवासी अंचल जुन्नारदेव में सबसे ज्यादा स्कूल है। यहीं पर शिक्षकों का टोटा भी है। आंकड़ों की माने तो जुन्नारदेव में ५४७ स्कूल है, इनमें ३९५ प्रायमरी स्कूल, १४० मीडिल स्कूल और १६ हाई स्कूल तथा २० हायर सेकेण्डरी स्कूल है, जिसमे ४० फीसदी स्कूल शिक्षकों की कमी से जूझ रहे है। इसी प्रकार तामिया में ३८४, हर्रई में ४५५ और बिछुआ २३५ स्कूल है। अधिकतर स्कूलों में भी शिक्षकों की कमी है।
अतिथि शिक्षक संभाल रहे व्यवस्था
जिले के अधिकतर सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक व्यवस्था अतिथि शिक्षकों के भरोसे चल रही है। ट्रायबल क्षेत्र के स्कूलों में सबसे अधिक अतिथि शिक्षक नियुक्त है, इसकी एक बड़ी वजह यह है कि सुदूर ग्रामीण आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों में जाकर बच्चों को पढ़ाने से शिक्षक परहेज करते हैं। यही वजह है कि यहां के अधिकतर स्कूल शिक्षक विहीन है। ऐसे में इन स्कूलों की व्यवस्था अतिथि शिक्षक के भरोसे चल रही है।
