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दरभंगा छात्रावास दौरे के बाद उठाई आवाज, पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप में देरी पर जताई चिंता
नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने देशभर के वंचित समुदायों के छात्रों की शिक्षा में आ रही गंभीर चुनौतियों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। पत्र में राहुल गांधी ने दो प्रमुख समस्याओं की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया है, पहली, वंचित वर्गों के लिए छात्रावासों की बदहाल स्थिति और दूसरी, मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति में देरी और गिरावट।
राहुल गांधी ने अपने पत्र में लिखा है कि हाल ही में बिहार के दरभंगा स्थित अंबेडकर छात्रावास का दौरा करने पर उन्होंने छात्रों की दयनीय स्थिति देखी। उन्होंने बताया कि एक ही कमरे में 6-7 छात्रों को रहने पर मजबूर किया जा रहा है, शौचालय गंदे हैं, पीने का पानी अशुद्ध है, मेस की कोई व्यवस्था नहीं है और पुस्तकालय व इंटरनेट जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। इस पत्र में उन्होंने आगे कहा है, कि देशभर में दलित, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी, ईबीसी और अल्पसंख्यक समुदायों के लाखों छात्र ऐसे ही हालात में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। इन हालातों में न केवल उनकी शिक्षा प्रभावित होती है, बल्कि आत्मसम्मान और भविष्य की संभावनाएं भी धूमिल हो जाती हैं।
राहुल गांधी ने दूसरे बड़े मुद्दे के रूप में पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप की खराब स्थिति का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि बिहार में तीन साल तक छात्रवृत्ति पोर्टल काम नहीं कर रहा था और 2021-22 में एक भी छात्र को छात्रवृत्ति नहीं मिली। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2023 में जहां 1.36 लाख दलित छात्रों को छात्रवृत्ति मिली थी, वहीं वित्त वर्ष 2024 में यह संख्या घटकर मात्र 0.69 लाख रह गई, जो चिंताजनक है।
राहुल की केंद्र से प्रमुख दो मांगें
देशभर के वंचित छात्रों के छात्रावासों का ऑडिट किया जाए, और बुनियादी सुविधाओं जैसे साफ-सफाई, भोजन, शैक्षणिक संसाधनों को सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध कराया जाए।
मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति का समय पर वितरण सुनिश्चित किया जाए, छात्रवृत्ति राशि में वृद्धि की जाए, और राज्य सरकारों के साथ समन्वय कर क्रियान्वयन में सुधार किया जाए।
राहुल गांधी ने पत्र के अंत में लिखा है, कि जब तक हाशिए पर खड़े समुदायों के युवा आगे नहीं बढ़ेंगे, तब तक भारत भी आगे नहीं बढ़ सकता। उन्होंने प्रधानमंत्री से इन मुद्दों पर सकारात्मक और त्वरित कदम उठाने की आशा जताई है। राहुल गांधी का यह पत्र सामाजिक न्याय और समान शिक्षा अवसरों की दिशा में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।

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