
वडोदरा में “आदिवासी अधिकार संविधान सम्मेलन” में जल-जंगल-जमीन और सामाजिक न्याय के मुद्दों को उठाया
वडोदरा | लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी गुजरात के संस्कारी शहर वडोदरा पहुंचे, जहां एयरपोर्ट पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान गुजरात कांग्रेस प्रभारी मुकुल वासनिक, प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा और विधानसभा कांग्रेस दल के नेता तुषार चौधरी सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इसके बाद शहर के आजवा चौकड़ी स्थित नगर निगम ऑडिटोरियम में “आदिवासी अधिकार संविधान सम्मेलन” का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में राहुल गांधी का स्वागत पारंपरिक आदिवासी नृत्य से किया गया, जहां उन्होंने कलाकारों से मुलाकात भी की।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने “आदिवासी” शब्द के गहरे अर्थ पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आदिवासी इस देश के मूल निवासी और वास्तविक मालिक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इतिहास के दौरान आदिवासियों से उनकी जमीन, जंगल और जल छीन लिए गए और आज उनकी पहचान को “वनवासी” जैसे शब्दों से बदलने की कोशिश हो रही है। राहुल गांधी ने महान आदिवासी नेता बिरसा मुंडा के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह उनके संघर्ष और विचारधारा पर भी हमला है। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर आदिवासियों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है और कई बार उन्हें उचित मुआवजा भी नहीं मिलता। उन्होंने जाति जनगणना की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि देश की सामाजिक संरचना को समझने के लिए यह आवश्यक है। साथ ही निजीकरण की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे वंचित वर्गों को मिलने वाले अवसर सीमित हो रहे हैं।
राहुल गांधी ने कॉर्पोरेट क्षेत्र में असमानता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि शीर्ष कंपनियों में आदिवासी, दलित और पिछड़े वर्गों का प्रतिनिधित्व बेहद कम है। उन्होंने बड़े उद्योगपतियों के कर्ज माफी और आम नागरिकों के साथ हो रहे भेदभाव का भी जिक्र किया। जीएसटी को लेकर उन्होंने कहा कि अमीर और गरीब पर समान कर दर लागू होना असमानता को बढ़ाता है। इसके अलावा उन्होंने डेटा को 21वीं सदी की सबसे बड़ी संपत्ति बताते हुए इसके नियंत्रण को देश के भविष्य के लिए अहम बताया।
