
वरिष्ठ अधिवक्ता से लेकर जुड़ा है मामला
नई दिल्ली। केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय हाल के कुछ माह में अपनी कार्यशैली के कारण सुप्रीम कोर्ट के निशाने पर आ चुका है। अब सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड्स ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की एक कार्रवाई पर ना सिर्फ आपत्ति जाहिर की है, बल्कि बयान जारी कर ईडी के एक्शन के तहत छिपे निहितार्थ को भी उजागर किया है।
दरअसल, ईडी ने वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार को हाल ही में समन जारी किया है। इस पर सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड्स ने आपत्ति जताकर बयान जारी किया है, जिसमें कानूनी पेशेवरों के लिए चिंता जाहिर की गई है।
16 जून को सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड्स के मानद सचिव निखिल जैन द्वारा हस्ताक्षरित बयान में ईडी की कार्रवाई को अनुचित करार देकर कहा गया है कि यह कानूनी पेशे और कानून के शासन के कामकाज को प्रभावित करने वाली प्रवृत्ति है, जो जांच के दायरे से बाहर है। सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड्स ने ईडी की ऐसी प्रवृति पर गहरी चिंता जाहिर की है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बयान में कहा गया है, दातार एक सम्मानित वरिष्ठ अधिवक्ता हैं, जिसकी ईमानदारी पर कोई सवाल नहीं उठा सकता। उन्होंने पेशेवर आचरण और कानूनी नैतिकता के शीर्ष मानकों को लगातार बनाए रखा है। सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड्स ने कहा कि ईडी की कार्रवाई कानूनी सलाह को आपराधिक मिलीभगत करार दे रही है जो दुर्भाग्यपूर्ण है। बयान में कहा गया है कि ईडी का यह दृष्टिकोण संवैधानिक रूप से अस्थिर और कानूनी रूप से अनुचित है।
बयान में कहा गया है कि इस तरह की कार्रवाइयों से कानूनी सलाहकारों की स्वतंत्रता और नागरिकों के बिना किसी डर के कानूनी प्रतिनिधित्व के संवैधानिक अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा है। एसोसिएशन ने कहा, “यह कदम बड़े पैमाने पर कानूनी समुदाय को एक भयावह संदेश देता है और प्रत्येक नागरिक के बिना किसी डर को भय के स्वतंत्र कानूनी परामर्श प्राप्त करने के मूलभूत अधिकार को खतरे में डालता है।”
सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड्स ने कहा कि वह एजेंसियों द्वारा कार्यकारी शक्ति के मनमाने प्रयोग के खिलाफ अपना कड़ा विरोध दर्ज कराता है। इस बीच, ईडी ने दातार को जारी किया समन वापस लिया है।
क्या है मामला?
बता दें कि ईडी ने दातार को समन केयर हेल्थ इंश्योरेंस द्वारा रेलिगेयर एंटरप्राइजेज की पूर्व चेयरपर्सन रश्मि सलूजा को दिए कर्मचारी स्टॉक विकल्प योजना (ईएसओपी) की जांच के सिलसिले में दिया है। दरअसल, दातार ने सलूजा को कानूनी सलाह दी थी। कर्मचारी स्टॉक विकल्प योजना अब ईडी और भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा ) की समानांतर जांच का विषय है। एजेंसी इसकी जांच कर रही है कि क्या 2.27 करोड़ से अधिक ईएसओपी-जिनकी कीमत 250 करोड़ से अधिक है का जारी होना विनियामक मानदंडों का उल्लंघन था या वित्तीय अनियमितता से जुड़ी एक बड़ी योजना का हिस्सा था।
