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बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिए अहम निर्देश
मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि उद्योगपति रतन टाटा के स्वामित्व वाले शेयर उनके बाद टाटा द्वारा स्वयं स्थापित एक धर्मार्थ संस्था को दान कर दिए जाएंगे। वसीयत में उल्लेखित नहीं किए गए सूचीबद्ध और गैर-सूचीबद्ध शेयरों को रतन टाटा एंडोमेंट फाउंडेशन और रतन टाटा एंडोमेंट ट्रस्ट में समान रूप से वितरित किया जाएगा, बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा हाल ही में दिए गए एक फैसले में यह स्पष्ट किया है। – क्या है मामला ?
रतन टाटा के स्वामित्व वाले और वसीयत में उल्लेखित नहीं किए गए सूचीबद्ध और गैर-सूचीबद्ध शेयरों के साथ वास्तव में क्या किया जाना चाहिए? यह प्रश्न टाटा की वसीयत के निष्पादकों के समक्ष उठा। तदनुसार, बॉम्बे हाईकोर्ट में एक प्रोबेट आवेदन दायर किया गया था।न्यायमूर्ति मनीष पितले की एकल पीठ के समक्ष रतन टाटा की वसीयत पर सुनवाई हुई। इस सुनवाई को पूरा करने के बाद, हाई कोर्ट ने 5 मई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस फैसले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वसीयत में नहीं दिए गए शेयर, खास तौर पर अन्य धाराओं में, रतन टाटा की संपत्ति का हिस्सा हैं, जिन्हें निर्देशित नहीं किया गया है। इसलिए, इन शेयरों को टाटा द्वारा खुद स्थापित दो धर्मार्थ संस्थाओं के बीच बराबर-बराबर बांटा जाना चाहिए। इसलिए, बॉम्बे हाईकोर्ट ने टाटा की वसीयत के निष्पादकों को निर्देश दिया है कि वे इन शेयरों को रतन टाटा एंडोमेंट फाउंडेशन और रतन टाटा एंडोमेंट ट्रस्ट के बीच बराबर-बराबर बांटें।

कोर्ट तक कैसे पहुंचा वसीयत विवाद
वसीयत की निष्पादक बहनों ने 27 मार्च, 2025 को प्रोबेट की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर कोर्ट ने इस बात से असहमत किसी भी वारिस को सार्वजनिक नोटिस देने का आदेश दिया था। 9 अप्रैल को उन्होंने इस संबंध में ओरिजिनेटिंग समन भी दाखिल किया था। इस समन का इस्तेमाल कोर्ट में वसीयत और लाभार्थियों से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए किया जाता है। दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा का 9 अक्टूबर 2024 को मुंबई में निधन हो गया। समाज के लिए लगातार और सक्रिय रूप से काम करने वाले रतन टाटा ने अपनी मृत्यु के बाद भी अपनी संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा सामाजिक कार्यों के लिए दान कर दिया है। बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के बाद बचा हुआ हिस्सा भी टाटा की उन संस्थाओं को दिया जाएगा जो सामाजिक कार्य करती हैं। रतन टाटा की 3,900 करोड़ रुपये की संपत्ति की कानूनी मान्यता के लिए पहले प्रोबेट दायर किया गया था। उसके बाद टाटा समूह के ताज होटल्स की पूर्व निदेशक और रतन टाटा की करीबी दोस्त के रूप में जानी जाने वाली मोहिनी मोहन दत्ता ने रतन टाटा की वसीयत की शर्तों को स्वीकार कर लिया है। इसलिए टाटा की वसीयत के मुताबिक मोहिनी दत्ता को टाटा की एक तिहाई संपत्ति यानी करीब 588 करोड़ रुपये मिलेंगे।

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