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मुख्यमंत्री के बंगले पर चल रहे मीसाबंदियों के सम्मेलन में इन्दौर के रामबाबू ने फर्जीवाड़े के खिलाफ सौंपा ज्ञापन –

भोपाल। भोपाल में मुख्यमंत्री निवास पर गुरुवार को आयोजित मीसाबंदियों के प्रादेशिक सम्मेलन में उस समय कुछ देर के लिए हंगामा खड़ा हो गया, जब इन्दौर के मीसाबंदी और लोहिया विचार मंच के प्रमुख रामबाबू अग्रवाल ने विदिशा के एक अन्य मीसाबंदी के साथ मंच पर चढ़कर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को ज्ञापन सौंपकर उनसे मांग की कि जो लोग जेल नहीं गए या जिन्होंने मीसा कानून की तकलीफें नहीं झेली हैं, ऐसे लोगों को तत्काल मीसाबंदियों की सूची से बाहर किया जाए और प्रदेश में जिन लोगों को मीसाबंदी के नाम पर पेंशन का लाभ मिल रहा है, उनके बारे में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति बनाकर जांच कराई जाए।
रामबाबू अग्रवाल ने बताया कि प्रदेश के मीसा बंदियों की सूची में अनेक ऐसे लोगों के नाम भी शामिल हैं, जो या तो जेल गए ही नहीं या जिन्होंने मीसाबंदी की कोई तकलीफ नहीं झेली। कांग्रेस से जुड़े कुछ नेता भी मीसा में बंद हुए थे और उन्हें भी अब पेंशन का लाभ मिल रहा है। इस विसंगति की ओर मुख्यमंत्री का ध्यान दिलाने के लिए उन्होंने आज मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित मीसाबंदियों के प्रादेशिक सम्मेलन में मंच पर चढ़कर मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेंट करने किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वयं कुर्सी से खड़े होकर रामबाबू के हाथों से उक्त ज्ञापन लिया और उनकी बात भी सुनी। मुख्यमंत्री ने मंच से ही रामबाबू को आश्वस्त किया कि मैं पूरा न्याय करने की कोशिश करूंगा। इस बीच तपन भौमिक ने जब कहा कि सम्मेलन के बाद चर्चा करेंगे तो रामबाबू ने कहा कि बाद में तो हम सब चले जाएंगे, चर्चा करना है तो अभी करना चाहिए।
रामबाबू ने बाद में सम्मेलन स्थल पर राजधानी के पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि डॉ. मोहन यादव की सरकार को वास्तव में मीसाबंदियों का सम्मान करना है तो एक हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाकर अपात्र लोगों को बाहर करना चाहिए, ताकि मीसाबंदियों के नाम पर पात्र लोग लाभ न उठा सकें। जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि तुलसी सिलावट का सम्मान क्यों कर रहे हैं वे तो कांग्रेस में थे तो रामबाबू ने कहा कि उस समय कांग्रेस की गुटबाजी के कारण कांग्रेस के ही कुछ नेता जिनमें तुलसी सिलावट, के.के. मिश्रा, छोटू शुक्ला, मोहन ढाकोनिया आदि शामिल थे, वास्तव में जेल में बंद थे। इतने दिनों बाद उनका सम्मान क्यों किया जा रहा है, यह तो मोहन यादव सरकार की बता सकेगी।

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