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भारत के चीफ जस्टिस और राष्ट्रपति को लिखेंगे पत्र
हैदराबाद। तेलंगाना हाईकोर्ट की एक महिला जज से वकील नाराज हैं। वकीलों का आरोप है कि जस्टिस मौसमी भट्टाचार्य ठीक से अंग्रेजी नहीं बोलने पर वकीलों को अपमानित करती हैं। साथ ही भारी जुर्माना लगाने को लेकर भी वकील नाराज हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक तेलंगाना हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन ने जस्टिस मौसमी भट्टाचार्य के ट्रांसफर को लेकर भारत के चीफ जस्टिस और राष्ट्रपति को पत्र लिखने का फैसला किया है।
बता दें 26 जून को हाईकोर्ट के एसोसिएशन हॉल में बैठक हुई थी, जिसमें जस्टिस मौसमी भट्टाचार्य के मुद्दे पर चर्चा हुई। रिपोर्ट के मुताबिक वकीलों का आरोप है कि जज मौसमी बार के कई सदस्यों को नीचा दिखाती हैं और ठीक से तैयार नहीं करने या अंग्रेजी नहीं बोल पाने जैसी बातों पर अपमानित करती हैं। वकील कहते हैं कि तेलंगाना हाईकोर्ट में पद संभालने के बाद ही जस्टिस मौसमी भट्टाचार्य का वकीलों के खिलाफ अपमानजनक बर्ताव शुरू हो गया था। बार के एक सदस्य ने बताया कि कई वरिष्ठ वकीलों ने उनसे मुलाकात की और कहा कि मैडम जूनियर वकीलों का आपके सामने केस पेश करना मुश्किल हो गया है। वह कहती हैं कि बर्ताव में सुधार करेंगी, लेकिन कुछ नहीं बदला।
वकीलों का अपमान करना जारी है और इसके अलावा वह कुछ भी जुर्माना लगा देती हैं। एक वकील ने कहा कि यह अनुचित आलोचना है, क्योंकि इससे जूनियर वकीलों के मनोबल पर असर पड़ता है और पिछड़ी पृष्ठभूमि से आने वाले वकीलों के लिए ऐसा बर्ताव असंवेदनशील है। कई वकीलों का आरोप है कि जस्टिस भट्टाचार्य उनपर या क्लाइंट्स पर भारी जुर्माना लगा देती हैं। एक अन्य वकील ने बताया कि अप्रैल 2025 वह में एक आपराधिक याचिका में स्थगन चाहते थे और इसकी तीन बार मांग की। अब 2 अप्रैल को जस्टिस भट्टाचार्य ने स्थगन पर चर्चा की और प्रभाकर के क्लाइंट के लिए नया वकील नियुक्त करने के निर्देश हाईकोर्ट की रजिस्ट्री को दिए। तब उन्होंने कहा था, वकील की तरफ से स्थगन के लिए बताई गई वजह अप्रासंगिक है और कोर्ट को स्वीकार्य नहीं है। बता दें जस्टिस मौसमी भट्टाचार्य को साल 2017 में कलकत्ता हाईकोर्ट का जज नियुक्त किया था। फरवरी 2024 में उन्होंने तबादले की मांग की और मार्च 2024 में तेलंगाना हाईकोर्ट में नियुक्त हो गईं।

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