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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष की याचिका खारिज की
प्रयागराज/मथुरा। मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद को विवादित ढांचा घोषित करने की मांग वाली याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। हिंदू पक्ष की याचिका पर 23 मई को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।
दरअसल, 5 मार्च को हिंदू पक्ष के वकील महेंद्र प्रताप सिंह ने विवादित ढांचा घोषित करने को लेकर याचिका दाखिल की थी। कोर्ट ने कहा था कि मस्जिद के पास जमीन के कागज नहीं हैं, इन्होंने अतिक्रमण कर रखा है। इसे मस्जिद क्यों कहा जाए? इसलिए मस्जिद को भी विवादित ढांचा घोषित किया जाए। इसके खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने आपत्ति दाखिल की थी। कहा था कि हिंदू पक्ष की मांग सरासर गलत है। इस मामले में जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की सिंगल बेंच में अब तक चार बार सुनवाई हो चुकी है। इस याचिका के अलावा, हिंदू पक्ष की 18 अन्य याचिकाओं पर भी हाईकोर्ट में सुनवाई अलग से चल रही है।
हिंदू पक्ष का दावा- मस्जिद की जगह पहले मंदिर था
हिंदू पक्ष का कहना है कि शाही ईदगाह की जगह पहले मंदिर था। वहां पर मस्जिद होने का कोई भी साक्ष्य आज तक मुस्लिम पक्ष कोर्ट में पेश नहीं कर सका। जिसे मस्जिद कहा जा रहा है, उस की दीवारों पर हिंदू देवी देवताओं के प्रतीक चिह्न मौजूद हैं। किसी की जमीन पर अतिक्रमण करके बैठ जाने से, वह जमीन उसकी नहीं हो जाती है। न ही जमीन से जुड़ी खसरा-खतौनी में मस्जिद का नाम है। न नगर निगम में कोई रिकॉर्ड है और न ही टैक्स दिया जा रहा है। यहां तक की बिजली चोरी की रिपोर्ट भी शाही ईदगाह प्रबंध कमेटी के खिलाफ हो चुकी है। फिर इसे मस्जिद क्यों कहा जाए? जो प्रकरण अयोध्या में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद का था। ठीक वही मामला मथुरा में भगवान श्री कृष्ण की जन्मभूमि का है। कोर्ट ने अयोध्या मामले में अपना निर्णय देने से पहले बाबरी मस्जिद को विवादित ढांचा घोषित किया था, इसलिए मस्जिद को भी विवादित ढांचा घोषित किया जाए।
मुस्लिम पक्ष ने कहा था- 400 सालों से यह शाही ईदगाह
मुस्लिम पक्ष ने आपत्ति में कहा था- हिंदू पक्ष की मांग सरासर गलत है। 400 सालों से यह शाही ईदगाह है, इसलिए इसे विवादित ढांचा घोषित करने की मांग कठोर दंड के साथ खारिज किया जाना चाहिए।

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