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दमोह। महान सूफी संत हज़रत ख़्वाजा अब्दुस्सलाम चिश्ती रहमत तुल्ल्लाह अलैह की दरगाह पर ऊर्दू कलेण्डर अनुसार 4 जुलाई को मोहर्रम की आठ तारीख़ दिन शुक्रवार को विशाल फ़ातिहा और लंगर का आयोजन हुआ जजिसमें सैकड़ों अकीदतमंदों ने शिरकत की। गौरतलब है कि चाँद की हर आठ तारीख़ को स्थानीय पुराना बाज़ार चिश्ती नगर स्थित दरगाह ख़्वाजा अब्दुस्सलाम चिश्ती के दरबार में हर महीने फातिहा होती है लेकिन चिश्ती नगर में ख़्वाजा साहब के आस्ताने पर प्रतिवर्ष मोहर्रम की 8 तारीख विशेष रूप से बड़े पैमाने पर मनाई जाती है। आठ मोहर्रम के अवसर पर सुबह आस्ताने पर कुरआन ख़्वानी हुई बाद में लंगर का आयोजन चला जो दिनभर चलता रहा । इस अवसर पर बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने हिस्सा लिया । वहीं शाम 7 बजे मुख्य रूप से बाद मग़रिब दरबारे ख़्वाजा में होनें वाली सामुहिक फ़ातिहा ख़्वानी में नगर व आसपास के सभी अकीदतमंदों और मुरीदों ने एक साथ आस्ताने पर फ़ातिहा में शिरकत कर मुल्क में अमन चौन की दुआएं माँगी। वहीं रात 10 बजे से आस्ताने आलिया पर ऊर्दू साहित्यिक संस्था अदबी इदारा ए सलामी द्वारा महफिले मसालमा का आयोजन किया जिसमें स्थानीय शायरों ने नातिया कलाम और हज़रत इमाम हुसैन की शान में कलाम पढ़े प्रोग्राम के आखिर में बज्म के सद्र जनाब मंज़र दमोही ने सभी का शुक्रिया अदा किया।

गौरतलब है कि दमोह जिले में महफिले मसालमा की बुनियाद देश के प्रसिद्ध शायर मरहूम नैयर दमोही ने डाली थी जो सिलसिला आज सारे जिले व नगर में आज भी जारी है।
(क्या महत्व है चिश्ती नगर में आठ 8 मोहर्रम का) दरअसल मोहर्रम की आठ तारीख़ को ही महान सूफ़ी संत हज़रत ख़्वाजा अब्दुस्सलाम चिश्ती रहमत तुल्ल्लाह अलैह को मर्तबे हासिल हुए थे जब हज़रत अपनी जिंदगी में हयात थे वह भी चाँद की आठ तारीख़ औऱ खासकर मोहर्रम 8 को विशेष रूप से बुजुर्गों के नाम से फ़ातिहा ख़्वानी का एहतमाम हज़रत ख्वाजा अब्दुस्सलाम साहब चिश्ती ख़ुद किया करते थे उस वक़्त उन्होंने अपने सभी चाहने वाले मुरीदों को भी यह हिदायत की थी के हर माह ऊर्दू 8 तारीख़ को अपने घरों पर फातिहा रखा करें और विशेषकर 8 मोहर्रम क्योंकि इसी माहे मोहर्रम की आठ तारीख़ को हज़रत को बुजुर्गाने दींन ने बड़े मर्तबों से नवाज़ा गया था जिसकी याद आज भी हज़रत ख़्वाजा अब्दुस्सलाम चिश्ती रहमततुल्लाह अलैह के मानने वाले मनाते आ रहे है यह जानकारी इम्तियाज़ चिश्ती ने एक विज्ञप्ति के माध्यम से दी।

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