
नक्सलियों को विस्फोटक सामग्री उपलब्ध कराता था ग्रामीण नैनसिंह
परिजनों ने लगाया गुमराह कर गिरफ्तार करने का आरोप
बालाघाट। नक्सल संगठन को सहयोग करने वालों पर पुलिस ने शिकंजा कसना प्रारंभ कर दिया है। पुलिस ने ऐसे ही मामले में हट्टा थाना क्षेत्र के गोदरी चौकी अंतर्गत ठाकुरटोला निवासी स्लीपर सेल नैनसिंह धुर्वे को गिरफ्तार किया है। नैनसिंह के घर से पुलिस ने नक्सली संतु के हाथों की लिखी आईडी ब्लॉस्ट की सामग्री उपलब्ध कराने वाले पर्ची को बरामद किया है। पुलिस ने नैनसिंह के मोबाइल को भी जब्त कर उसे जांच में लिया है। इधर, परिजनों ने नैनसिंह को गुमराह कर गिरफ्तार करने का आरोप लगाया है।
पुलिस के अनुसार बीते दिनों पचामा दादर-कटेझिरिया के जंगल में नक्सलियों से हुई मुठभेड़ के बाद जंगलों में सर्चिंग जारी थी। नक्सलियों की तलाश की जा रही थी। साथ ही नक्सलियों की मदद करने वालों और पूरे ईकोसिस्टम की जानकारी भी जुटाई जा रही थी। इसी दौरान ठाकुरटोला निवासी नैनसिंह धुर्वे की लगातार नक्सलियों को मदद करने और नक्सल विचारधारा का प्रचार-प्रसार करने की सूचना प्राप्त हो रही थी। जिसके चलते पुलिस ने उस पर नजरें रखी हुई थी। नैनसिंह को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ की गई। पूछताछ में नैनसिंह ने नक्सल गतिविधियों में शामिल होने की बात स्वीकार की। नैनसिंह ने पुलिस को बताया कि नक्सलियों ने पिछले 6 माह में गांव में तीन से चार बैठकें कर चुके हैं।
नक्सलियों की मांग पर सामग्री देता था नैनसिंह
पुलिस ने बताया कि नक्सलियों की मांग पर नैनसिंह उन्हें सामग्री उपलब्ध कराता था। पूछताछ में नैनसिंह ने बताया कि आईडी ब्लॉस्ट में उपयोग की जाने वाली कुकर बम्ब बनाने की सामग्री, मल्टीमीटर बैटरी, वायर, ब्राउन टेप, ग्रीस, इलेक्ट्रॉनिक टेप, बोल्ट कटर सहित अन्य सामग्री उपलब्ध कराई है।
घर की सर्चिंग लेने पर मिली पर्ची
पुलिस के अनुसार जब नैनसिंह के घर की तलाशी ली गई तो नक्सली संतु के हाथों की लिखी पर्ची भी मिली। इस पर्ची पर स्पष्ट रुप से विस्फोट करने की सामग्री उपलब्ध कराने की बातों का उल्लेख था। इस तरह से नैनसिंह के खिलाफ विधि विरुद्ध क्रियाकलाप की गतिविधियों में संलिप्त होने के पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं। पुलिस ने बताया कि नैनसिंह के मोबाइल को भी जब्त किया गया है। जब्त फोन की जांच की जा रही है।
परिजनों का आरोप : 100 एकड़ जमीन का पट्टा देने का दिया लालच
जिला मुख्यालय पहुंचे नैनसिंह की मां धुरपता बाई, भाई भैनसिंह ने बताया कि नैनसिंह को 100 एकड़ जमीन का पट्टा देने की बात कहकर 3 जुलाई को घर से लेकर गए थे। उन्होंने बताया कि पुलिस कर्मचारी रिंकु राणा की दोस्ती नैनसिंह के साथ है। रिंक राणा ने ही उन्हें गुमराह किया। शाम तक नैनसिंह घर नहीं लौटा तो पुलिस कर्मचारी रिंकु से संपर्क किया गया लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। 4 जुलाई को जब पुन: रिंकु राणा से संपर्क कर नैनसिंह चर्चा कराने की बात कही गई। चर्चा के दौरान नैनसिंह ने उन्हें जानकारी दी कि पुलिस उसे बहुत प्रताडि़त कर रही है। शराब पिलाकर उसके संबंध नक्सलियों से होने की बात कबूलवा रही है।
पुलिस ने जबरन घर में घुसकर ली तलाशी
परिजनों ने बताया कि 4 जुलाई को ही 10 गाडिय़ों से करीब 30-40 पुलिस कर्मचारी घर पहुंचे। उन्होंने जबरन घर में घुसकर तलाशी ली। तलाशी के दौरान उन्हें नक्सलियों से जुड़ी कोई भी चीज नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने एक कोरे कागज पर हस्ताक्षर भी करवाए। इसी दिन शाम करीब 5 बजे पुन: पुलिस घर पहुंची। सभी को घर से बाहर निकाल दिया। 5-6 पुलिस कर्मचारी घर के अंदर घुसे। पेटी को खोलकर उसमें कुछ कागज डाल दिए। पेटी में सभी के दस्तावेज आधार कार्ड, मार्कशीट, बैंक पासबुक सहित अन्य सामग्री थी, उसे जब्त कर ले गए। वहीं नैनसिंह और दो अन्य लडक़ों को जंगल लेकर गए, जहां नैनसिंह के पास से नक्सल सामग्री बरामद हुए कहकर कागज में लडक़ों से हस्ताक्षर करवा लिए।
मामले की निष्पक्ष जांच करने की मांग
पीडि़त परिजनों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच किए जाने की मांग की है। साथ ही इस मामले में दोषी पुलिस कर्मचारियों पर कार्यवाही और नैनसिंह को मुक्त करने की मांग की है।
आदिवासियों पर अत्याचार बंद करें पुलिस-कंकर
पूर्व सांसद कंकर मुंजारे ने कहा कि नक्सलियों के नाम पर आदिवासियों पर अत्याचार करना बंद करे। उन्होंने कहा कि नैनसिंह एक साधारण किसान है। वह कृषि कार्य कर अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण करता है। लेकिन पुलिस ने उसे जबरन ही नक्सलियों का सहयोग बताकर गिरफ्तार कर लिया है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने इसके पूर्व भी फर्जी एनकाउंटर कर बेगुनाह आदिवासियों की हत्या की है। पूर्व सांसद मुंजारे ने इस मामले की जांच कर दोषियों पर कार्यवाही की मांग की है।
