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पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे 22 जुलाई तक ईडी की 5 दिन की रिमांड पर
जन्मदिन पर पर चैतन्य बघेल गिरफ्तार -ईडी की कार्रवाई के खिलाफ सडक़ पर उतरी कांग्रेस…


नई दिल्ली/रायपुर। प्रवर्तन निदेशालय ने कांग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को शुक्रवार को ईडी ने अरेस्ट कर लिया है। उन्हें भिलाई स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया है। चैतन्य बघेल की यह गिरफ्तारी ऐसे समय पर हुई है, जब सुबह ईडी ने भूपेश बघेल के घर पर छापेमारी की। चैतन्य बघेल की यह गिरफ्तारी कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई है। चैतन्य का शुक्रवार को जन्मदिन भी था। बताया जा रहा है कि इस मामले में नए साक्ष्य मिलने के बाद ईडी ने पीएमएलए के तहत चैतन्य को गिरफ्तार किया है। ईडी ने चैतन्य बघेल को रायपुर की स्पेशल कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने चैतन्य को 22 जुलाई तक ईडी की 5 दिन की रिमांड पर भेजा है। कोर्ट में भूपेश बघेल, चरणदास महंत, मोहम्मद अकबर समेत कई बड़े नेता मौजूद रहे।
ईडी ने शुक्रवार सुबह-सुबह भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य के भिलाई घर पर छापेमारी की थी। ईडी की टीम तीन गाडिय़ों में सुबह करीब 6:30 बजे मौके पर पहुंची और सीआरपीएफ के सुरक्षा घेरे में घर की तलाशी शुरू की गई। यह कार्रवाई ऐसे समय पर हुई है, जब शुक्रवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा का अंतिम दिन है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल विधानसभा में रायगढ़ जिले में हो रही पेड़ कटाई का मुद्दा उठाने वाले थे। विधानसभा जाते वक्त भूपेश बघेल ने कहा कि पिछली बार मेरे जन्मदिन पर ईडीको भेजा गया था। इस बार मेरे बेटे के जन्मदिन पर मोदी-शाह ने अपने मालिक को खुश करने के लिए ईडी को भेजा है। भूपेश बघेल न झुकेगा और न ही डरेगा। आज विधानसभा में अडाणी का मुद्दा उठेगा, इसलिए ईडी को भेजा गया है।
चैतन्य बघेल पर आरोप
बता दें कि भिलाई से ईउी की टीम ने भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को गिरफ्तार कर लिया है। चैतन्य पर शराब घोटाले में बड़ा हिस्सा लेने, कोल लेवी मामले में संलिप्ता, महादेव ऐप मामले में संलिप्ता, पैसों को हलावा के जरिए से मनी लॉन्ड्रिंग कराने का आरोप है। गौरतलब है कि शराब घोटाले में 7 जुलाई को आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा ने शराब घोटाले में चौथी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की, जिसमें घोटाले की अनुमानित राशि को 2,161 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 3,200 करोड़ रुपये बताया गया। यह चार्जशीट 30 जून को दाखिल की गई थी। इस केस में अब तक कुल पांच चार्जशीट दायर की जा चुकी हैं, जिनमें से तीन पहले दाखिल की जा चुकी थीं। इस घोटाले में 29 आबकारी अधिकारियों (जिला अधिकारी, सहायक आयुक्त, उप आयुक्त) को आरोपी बनाया गया है, जिनमें कुछ सेवानिवृत्त अधिकारी भी शामिल हैं।
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के बारे में क्या-क्या हुआ
ईडी की छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि राज्य में एक संगठित शराब सिंडिकेट काम कर रहा था, जिसमें अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा और कई अन्य लोग शामिल थे। इस घोटाले से करीब 2161 करोड़ रुपये की अवैध कमाई हुई। ईडी की जांच में यह भी पता चला है कि कवासी लखमा, जो तत्कालीन आबकारी मंत्री थे। उन्हें इस घोटाले से हर महीने मोटी नकद रकम दी जाती थी। यह रकम घोटाले से होने वाली कमाई से दी जाती थी। यह घोटाला साल 2019 से 2022 के बीच चला। इसमें अलग-अलग तरीके से अवैध कमाई की गई। शराब की खरीदारी पर डिस्टिलर्स (शराब बनाने वाली कंपनियों) से प्रति केस कमीशन के तौर पर रिश्वत ली जाती थी। यह शराब छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम द्वारा खरीदी जाती थी। राज्य की सरकारी दुकानों से बिना किसी रिकॉर्ड के कच्ची देशी शराब बेची जाती थी। इस बिक्री से सरकार को एक रुपया भी नहीं मिला, सारा पैसा सिंडिकेट की जेब में चला गया। डिस्टिलर्स से रिश्वत लेकर उन्हें फिक्स मार्केट शेयर दे दिए जाते थे, ताकि वे एक तरह से कार्टेल बना सकें। साथ ही एफएल-10ए लाइसेंसधारकों से भी विदेशी शराब के धंधे में एंट्री देने के बदले मोटी रकम वसूली जाती थी। इस मामले में श्वष्ठ अब तक करीब 205 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अटैच कर चुकी है। जांच अभी भी जारी है और इसमें और बड़े नामों के शामिल होने की संभावना है।

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