
मैन रोड पर गुमठियां रख लोगों ने खोली दुकानें, गुमठियों के पीछे करते हैं, शराब का सेवन
अशोकनगर । जिले में सरकारी जमीनों की अवैध खरीद-बिक्री और अतिक्रमण का काम बेरोकटोक जारी है। जिम्मेदार चुप हैं, उनकी अनदेखी से शहर की मंदिर माफी की जमीन लगातार संकरी होती जा रही है। प्रशासन कायदे कानून का पालन करवाने के बजाय हाथ पर हाथ धरे बैठा है। ऐसा ही एक मामला शहर के बाईपास रोड़ स्थित धनुषधारी मंदिर की बेशकीमती जमीन पर देखने को मिला है।
स्थानीय नए बस स्टैंड के समीप मेन रोड पर धनुषधारी मंदिर की जमीन पर दोबारा अवैध कब्जा हो रहा है। लेकिन प्रशासन इस बात से बेखबर है। ठेले, गुमठियों के बाद अब दबंगों ने यहां पक्के अतिक्रमण कर ढाबे और दुकाने खोल ली हैं। इन ठेले, गुमठियो और ढाबों में लोग शराब का सेवन करते हैं। शहर के नया बस स्टैंड के पास स्थित खसरा नंबर 669, श्री धनुषधारी मंदिर की कीमती जमीन पर दोबारा अवैध कब्जा कर लिया गया है। यह जमीन मुख्य सडक़ पर स्थित है, और पूर्व में तत्कालीन तहसीलदार द्वारा इस पर से अवैध कब्जा हटवाया गया था, लेकिन प्रशासन की अनदेखी के चलते अब फिर से इस पवित्र स्थल की जमीन पर होटल और गुमठियों का निर्माण कर लिया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन गुमठियों के पीछे शाम के समय कुछ असामाजिक तत्व बैठकर खुलेआम शराब का सेवन करते हैं। जिससे आसपास के लोगों, राहगीरों को दिक्कत होती है, तथा शराबियों के कारण भय वातावरण बना रहता है। इस मुद्दे पर अब तक प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे कब्जा धारियों के हौसले बुलंद हैं। इस जमीन पर पूर्व में दो बार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। लेकिन फिर से प्रशासन की अनदेखी के चलते लोगों ने अवैध कब्जा कर लिए और गुमठियां रखकर दुकान संचालित कर रहे हैं। इस संबंध में प्रशासन को अवगत कराया गया तो तहसीलदार अशोकनगर ने कहा कि मेरे जानकारी में यह बात नहीं है, मैं शीघ्र दिखवाता हूं। अगर प्रशासन द्वारा शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वेश कीमती जमीन लोगों का कब्जा बढ़ता ही जाएगा।
92 बीघा में से मौके पर बची सिर्फ 25 बीघा जमीन:
माफी औकाफ के दस्तावेजों में इस मंदिर के पास 21 सर्वे नंबरों में 19.362 हेक्टेयर (करीब 92 बीघा 13 बिस्वा) जमीन दर्ज है, जिसमें ज्यादातर सर्वे नंबर बस स्टैंड के आसपास हैं। लेकिन हकीकत में मंदिर की जमीन पूरी तरह पर कॉलोनियां बन चुकी है। मौके पर सिर्फ 20 से 25 बीघा जमीन ही बची हुई है। मंदिर की इस सरकारी जमीन को बेचने के लिए रजिस्ट्री हो नहीं सकती, इसलिए लोग इसे नोटरी के माध्यम से बेच रहे हैं और खरीदारों ने अपने मकान बना लिए हैं।
इनका कहना:
मेरी जानकारी में यह बात नहीं है, मैं दिखबाता हूं, शीघ्र कार्रवाई करेंगे।
भारतेंदू यादव तहसीलदार अशोक नगर।
