सुप्रीम कोर्ट ने कहा मरीज मॉडल नहीं…….. एनएमसी ने बनाएं नियम

इन्दौर। उच्चतम न्यायालय ने एक अहम फैसले में निजी अस्पतालों द्वारा सर्जरी के लाइव प्रसारण पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि यह सब फार्मा तथा मेडिकल उपकरण बनाने वाली कंपनियों के हित हेतु उनके दबाव में आयोजित होता है कि इस तरह की लाइव सर्जरी में कंपनियां अपने उपकरणोंको उत्पादों के साथ तकनीकों का प्रचार करती हैं। सुप्रीम कोर्ट में राहिल चौधरी बनाम भारत संघ मामले में हुई सुनवाई करते हुए यह निर्णय सुनाया। याचिका में मरीजों को मॉडल की तरह पेश किये जाने का आरोप लगाते कोर्ट को बताया गया था कि इस तरह की लाइव सर्जरियों द्वारा कंपनियां अपने उपकरणों और तकनीकों का प्रचार करती हैं। याचिका सुनवाई उपरांत कोर्ट ने सर्जरी के इस तरह से लाइव टेलीकास्ट पर रोक लगाते आदेश दिया कि परंपरागत ऑपरेशन का लाइव टेलीकॉस्ट नहीं किया जा सकेगा। हालांकि कोर्ट ने उन केसों में जिसमें कोई नई तकनीक का प्रदर्शन किया जाना है लाइव स्ट्रीमिंग की अनुमति दे दी है।
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने अस्पतालों द्वारा लाइव सर्जरी दिखाने हेतु नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब सिर्फ किसी नई तकनीक द्वारा की जा रही सर्जरी ही लाइव होगी तथा कोई विदेशी डॉक्टर या फैकल्टी भारत में सर्जरी करना चाहते हैं तो उन्हें एनएमसी और संबंधित राज्य मेडिकल काउंसिल से अस्थायी पंजीयन लेना होगा।
कोर्ट निर्णय के बाद लाइव सर्जरी कोई लेकर एनएमसी जो नियम बनाए उनमें मुख्य है।
1- केवल नई सर्जिकल तकनीक की ही लाइव स्ट्रीमिंग हो सकेगी।
2 – किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सर्जरी का प्रसारण प्रतिबंधित रहेगा।
3 – सर्जरी के दौरान सर्जन की व्यक्तिगत ब्रांडिंग या महिमामंडन नहीं किया जाएगा।
4 – सर्जन को शैक्षणिक योग्यता के बाद कम से कम 5 वर्षों का अनुभव होना चाहिए।
5 – प्रशिक्षणार्थियों से संवाद के लिए एक मॉडरेटर अनिवार्य होगा।
6 – सर्जरी के बाद ऑपरेटिंग सर्जन को मरीज की कम से कम 24 घंटे निगरानी करनी होगी।
7 – मरीज द्वारा पूर्व सहमति जरूरी, लेकिन वह कभी भी अपनी सहमति वापस ले सकता है।
ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट और एनएमसी द्वारा लाइव सर्जरी को लेकर यह शक्ति इसलिए उठाई कि याचिका पर याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि देश में हर साल सैकड़ों की संख्या में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस, कंटीन्यू मेडिकल एजूकेशन (सीएमई) का आयोजन किया जाता है। इसमें निजी अस्पतालों से लाइव सर्जरी का टेलीकास्ट किया जाता है। कई बार विदेशी फैकल्टी यहां आकर लाइव सर्जरी करती है। अधिकांश में यह देखा गया है कि मेडीकल उपकरण बनाने वाली कंपनियों तथा फार्मा कंपनी के उत्पादों के प्रचार प्रसार हेतु ही अस्पतालों से लाइव सर्जरी का प्रसारण किया जाता है। इसके बाद ही सुप्रीम कोर्ट ने मरीज को माडल नहीं बताते इन लाइव सर्जरी पर रोक लगा दी।
