
वनग्राम गांगुलपारा का मामला
बालाघाट। वन ग्राम गांगुलपारा जलाशय, पहाड़ों और जंगलों से घिरा हुआ है। गांव की आबादी करीब दो सैकड़ा है। गांव तक पहुंचने के लिए न तो रास्ता है और न ही गांव में ग्रामीणों को सुविधाएं मिल रही है। जिसके कारण ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों को यदि गांव से बाहर निकलना होता है तो उन्हें अपनी जान जोखिम में डालकर नालों को पार करना पड़ता है। यह समस्या प्रतिवर्ष बारिश के दिनों में बनी रहती है। बावजूद इसके अभी तक इस समस्या का समाधान नहीं किया है। मंगलवार को ग्रामीणों ने जिला मुख्यालय पहुंचकर कलेक्टर को समस्या से अवगत कराया। वैकल्पिक व्यवस्था नहीं किए जाने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
जिला मुख्यालय पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2023 में पूर्व विधायक रामकिशोर कावरे द्वारा 38 लाख रुपए की लगात से सुदूर सडक़ का निर्माण कराया गया था, जो अब पूरी तरह से नालों में तब्दील हो गई है। ग्रामीणों का शहर मुख्यालय से पूरी तरह से संपर्क टूटा हुआ है। गांगुलपारा मछुआ नाका से ग्राम तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को सात बड़े नालों को पार करना पड़ता है। इन समस्याओं से जूझते हुए पिछले कई वर्षों से जिला पंचायत, जनपद पंचायत, कलेक्टर, डीएफओ सहित अनेक प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं। इतना ही नहीं विधायक, सांसद और मंत्री तक को भी ज्ञापन सौंपे हैं। लेकिन आज तक इस मस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है।
चार पीढ़ी से कर रहे निवास
ग्रामीणों के अनुसार ईको पर्यटन क्षेत्र ग्राम पंचायत टेकाड़ी के वन ग्राम गांगुलपारा में वे पिछले चार पीढिय़ों से निवास कर रहे हैं। इस ग्राम के समीप जलाशय का पानी गांव से होते हुए तालाब में जाता है, जिसके कारण बरसात में रास्ता बंद हो जाता है। जिससे बच्चो का गांव से शहर तक विद्यालय आना जाना बंद हो जाता है। वहीं वन्य जीवों के हमले से घायल ग्रामीण या प्रसूताओं को जिला अस्पताल तक पहुंचाने के लिए 5 किलोमीटर का जंगल से पदयात्रा करना पड़ता है। बावजूद इसके समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
मांगे पूरी नहीं हुई तो बैहर रोड पर करेंगे निवास
गांगुलपारा आदिवासी ग्राम सभा अध्यक्ष धनीराम मर्सकोले, बिरसा बिग्रेड अध्यक्ष सत्येंद्र इनवाती ने बताया कि यदि प्रशासन द्वारा एक सप्ताह के भीतर वैकल्पिक पुलों का निर्माण नहीं करता है तो सभी ग्रामीण अपने-अपने परिवार के साथ बैहर मार्ग गांगुलपारा हाइवे में मकान बनाकर रहना प्रारंभ कर देंगे। उन्होंने बताया कि यह समस्या प्रतिवर्ष ग्रामीणों के लिए मुसीबत लेकर आती है। लेकिन आज तक किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। जिसके कारण समस्या जस की तस बनी हुई है।
