
आपने अपनी बेटी की शादी की, फिर अन्य महिलाओं को क्यों संन्यास के लिए प्रेरित करते हैं
चेन्नई । आध्यात्मिक प्रवचन देने वाले सदगुरु जग्गी वासुदेव से मद्रास हाई कोर्ट ने पूछा कि आपने अपनी बेटी की शादी की है और वह सांसारिक सुख-सुविधाओं से युक्त जीवन जी रही हैं। फिर आप अन्य महिलाओं को क्यों सिर मुंडाकर संन्यासी की तरह जीने के लिए प्रेरित करते हैं। कोर्ट ने यह सवाल एक रिटायर्ड प्रोफेसर की ओर से दाखिल अर्जी पर लिया। प्रोफेसर ने आरोप लगाया था कि मेरी उच्च शिक्षित बेटियों का ब्रेनवॉश किया गया है और वे स्थायी तौर पर ईशा योग केंद्र में ही रह रही हैं।
प्रोफेसर का दावा है कि उनकी बेटियों का जीवन नरक हो गया है, जब से उन्हें ईशा योग केंद्र में रखा गया है। हालांकि जजों ने इस मामले में और जांच करने का आदेश पुलिस को दिया है। इसके अलावा ईशा फाउंडेशन से जुड़े सारे केसों की लिस्ट भी तैयार करने को कहा है। इस केस की सुनवाई के दौरान जस्टिस सिवागननम ने कहा,हम यह जानना चाहते हैं कि जिस शख्स ने अपनी बेटी का विवाह किया और उसे सांसारिक सुख-सुविधाओं वाले जीवन में रखा। वह दूसरों की बेटियों को सिर मुंडाकर संन्यासी जैसा जीवन जीने के लिए क्यों प्रेरित कर रहा है।
ईशा फाउंडेशन ने अदालत की इन तीखी टिप्पणियों के जवाब में कहा कि ये महिलाएं स्वेच्छा से ईशा फाउंडेशन में हैं। उन्हें किसी तरह के दबाव में नहीं रखा गया है। ईशा फाउंडेशन ने कहा, हमारा विश्वास है कि वयस्कों को यह अधिकार है कि वे अपने विवेक से कोई भी रास्ता चुन लें। हम किसी पर शादी या फिर संन्यास नहीं थोपते। यह उनकी निजी पसंद है। ईशा फाउंडेशन ने कहा कि हमारे ऊपर फिलहाल एक ही पुलिस केस है। इसके अलावा एक पर कोर्ट ने ही रोक लगा रखी है।
