
इन्दौर। मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने एक दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और न्यायमूर्ति विवेक रूसिया की युगल पीठ के समक्ष हुई। जिसमें सुनवाई करते युगल पीठ ने मध्यप्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि चार सप्ताह के भीतर सरकार सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे स्थापित करे तथा इन सीसीटीवी कैमरों की रिकार्डिंग कम से कम एक माह तक सहेजकर रखी जाए। वहीं पुलिस के खिलाफ होने वाली शिकायतों का निराकरण भी चार सप्ताह में अनिवार्य रूप से किया जाए। याचिका में याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाने तथा पुलिस के खिलाफ होने वाली शिकायतों का निराकरण नहीं होने की बात कोर्ट को बताई थी। याचिका में याचिकाकर्ता अभय चौपड़ा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद ज्यादातर पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे नहीं हैं। जहां लगे हैं, वहां इंटरनेट कनेक्शन ही नहीं हैं। ऐसे में इन कैमरों का लाभ नहीं मिल पा रहा। वहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद अब तक पुलिस के खिलाफ होने वाली शिकायतों की जांच के लिए आयोग गठित नहीं हुआ। याचिका पर अतिरिक्त महाधिवक्ता आनंद सोनी ने शासन का पक्ष रखते हुए कोर्ट को बताया कि पुलिस थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं। इस पर याचिकाकर्ता ने बताया कि सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी में यह बात सामने आई है कि कई पुलिस थानों पर सीसीटीवी कैमरे नहीं हैं। जहां हैं, वहां इंटरनेट कनेक्शन नहीं है। इस पर हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि शासन चार सप्ताह के भीतर सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे स्थापित करे। तथा अगली सुनवाई पर सरकार बताए कि कोर्ट के आदेश के पालन में उसने क्या किया।
