
सीजेआई ने याचिकाकर्ता के वकील से सख्त लहजे में कहा- मुझे तेवर न दिखाएं
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें राज्य निर्वाचन आयोगों को राजनीतिक दलों की कथित अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के निर्देश देने की मांग की गई थी। चीफ जस्टिस बीआर गवई की अगुवाई वाली पीठ ने स्पष्ट कहा कि यह याचिका जनहित से ज्यादा प्रचार हित वाली लगती है, और इस पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का कोई औचित्य नहीं है।
उक्त जनहित याचिका घनश्याम दयालु उपाध्याय नामक व्यक्ति ने केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग के खिलाफ दायर की थी। बेंच ने याचिकाकर्ता से पूछा कि यह मामला सीधे उच्चतम न्यायालय में लाने के बजाय संबंधित उच्च न्यायालय में क्यों नहीं उठाया गया। चीफ जस्टिस बीआर गवई ने सख्त लहजे में कहा, कि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए जनहित याचिकाएं जरूरी हैं, लेकिन नीतिगत मामलों पर प्रचार के लिए दायर याचिकाएं हम स्वीकार नहीं कर सकते।
इसी बीच सुनवाई के दौरान कुछ ऐसा हुआ कि चीफ जस्टिस बीआर गवई नाराज हो गए और उन्होंने याचिकाकर्ता के वकील को चेतावनीभरे लहजे में कहा, कि मुझे तेवर मत दिखाइए, आपको याद दिलाने की जरूरत नहीं कि मुंबई हाईकोर्ट में क्या हुआ था। मैंने पहले भी आपको अवमानना से बचाया है।
सुनवाई और बहस के उपरांत ही पीठ ने याचिकाकर्ता को याचिका वापस लेने और वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने की अनुमति दे दी। जानकारी अनुसार उक्त जनहित याचिका में सभी राज्य निर्वाचन आयोगों को राजनीतिक दलों की गैरकानूनी गतिविधियों पर नजर रखने और उन्हें रोकने के लिए संयुक्त योजना बनाने के निर्देश देने की मांग की गई थी।
