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सेना में पुरुष और महिलाओं की भर्ती में अलग-अलग सीटें आरक्षित करना मनमानी
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय सेना की जज एडवोकेट जनरल ब्रांच में पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग सीटें आरक्षित करने की नीति को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि लैंगिक तटस्थता का मतलब है कि सभी योग्य उम्मीदवारों का चयन केवल योग्यता के आधार पर होना चाहिए न कि लिंग के आधार पर।
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस मनमोहन की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि कार्यपालिका पुरुषों के लिए सीटें आरक्षित नहीं कर सकती। पुरुषों के लिए छह और महिलाओं के लिए तीन सीटें तय करना मनमाना है और भर्ती की आड़ में इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती है। यह फैसला दो महिला याचिकाकर्ताओं की उस याचिका पर आया, जिसमें जेएजी में पुरुष और महिला उम्मीदवारों के लिए अलग वेकैंसी को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि सेना की यह नीति समानता के अधिकार का उल्लंघन करती है और महिलाओं के अवसरों को अनावश्यक रूप से सीमित करती है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 2023 के नियमों और लैंगिक तटस्थता का सही अर्थ यह है कि केंद्र सबसे योग्य उम्मीदवारों का चयन करे, चाहे वे किसी भी लिंग के हों। अदालत ने यह भी कहा कि अगर इस तरह की नीतियां अपनाई जाती रहीं, तो कोई भी राष्ट्र सुरक्षित नहीं रह सकता। कोर्ट ने साफ कहा कि महिलाओं की सीटों को सीमित करना संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत मिली समानता के अधिकार का उल्लंघन है। इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र और सेना को आदेश दिया कि वे आगे से भर्ती की संयुक्त मेरिट सूची तैयार करें, जिसमें पुरुष और महिला उम्मीदवारों का एकसमान मूल्यांकन किया जाए।
जज एडवोकेट जनरल विभाग भारतीय सेना की कानूनी शाखा है, जो सेना से जुड़े सभी कानूनी मामलों को संभालने के लिए जिम्मेदार है। यह विभाग अनुशासनात्मक मामलों, मुकदमों, संवैधानिक अधिकारों और कानून के पालन को तय करने में अहम भूमिका निभाता है। विभाग के अधिकारी सेना के अंदर कई कानूनी कार्यों में शामिल होते हैं, जिनमें सैन्य कर्मियों को अनुशासनात्मक मामलों, कोर्ट मार्शल और दूसरे कानूनी मुद्दों पर परामर्श देना, सेना का सिविल और क्रिमिनल मामलों में प्रतिनिधित्व करना शामिल है।
भारतीय सेना के जेएजी विभाग में शामिल होने के लिए लॉ ग्रैजुएट्स को जेएजी परीक्षा पास करनी होती है। यह परीक्षा योग्य उम्मीदवारों को सीधे सेना के कानूनी विभाग में अधिकारी के रूप में प्रवेश दिलाती है।

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