
चार साल बाद भी बड़े अफसरों पर नहीं हुई कार्रवाई, एसआईटी का होगा गठन
नई दिल्ली। नोएडा में नियमों को दरकिनार कर गेझा-तिलपताबाद समेत तीन गांवों में बांटे गए मुआवजे के मामले में चार साल बाद भी बड़े अफसरों पर कार्रवाई नहीं हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने अब नई एसआईटी के गठन का आदेश दिया है। इससे पहले दो एसआईटी इस मामले में जांच कर चुकी हैं। सबसे पहली एसआईटी की जांच से सुप्रीम कोर्ट संतुष्ट नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने अपात्रों को मुआवजा देने में शामिल अधिकारियों की संपत्ति की जांच के आदेश दिए है
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन अफसरों ने 20 मामलों में अपात्र किसानों को 117 करोड़ रुपए का मुआवजा बांट दिया था, लेकिन एक भी मामले में किसी भी बड़े अफसर पर कार्रवाई नहीं हुई। खास बात यह है कि एक हजार रुपए तक मुआवजा राशि वितरित करने के लिए भी मंजूरी की फाइल सीईओ स्तर तक के अधिकारी तक जाती है। नोएडा प्राधिकरण की तत्कालीन सीईओ ने 2021 की शुरुआत में गेझा तिलपताबाद, भूड़ा और नंगला गांव में गलत तरीके से बांटे गए मुआवजा गड़बड़ी को पकड़ा था। मामला उजागर होने पर नोएडा प्राधिकरण की तरफ से फेज वन कोतवाली में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज कराया था। इनमें प्राधिकरण अधिकारियों के खिलाफ भी मामला दर्ज हुआ था।
प्राधिकरण के विधि अधिकारी सुशील भाटी की तरफ से एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित एसआईटी ने गेझा तिलपताबाद, भूड़ा समेत तीन गांवों में 20 मामलों में अपात्र किसानों को अतिरिक्त मुआवजा देने की गड़बड़ी पकड़ी थी। यह मुआवजा 117 करोड़ 56 लाख 95 हजार रुपए है। इस मामले में नोएडा प्राधिकरण स्तर से उस समय विधि परामर्शदाता वीरेंद नागर व कुछ समय बाद दिनेश कुमार सिंह को निलंबित कर दिया गया था, लेकिन फाइलों पर हस्ताक्षर करने वाले ओएसडी, डीसीईओ, एसीईओ, सीएलए या सीईओ स्तर के किसी भी अधिकारी पर शासन स्तर से कार्रवाई नहीं की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजा वितरण में शामिल रहे अफसरों की संपत्ति की जांच के आदेश दिए हैं। उस दौरान कौन-कौन अफसर प्राधिकरण में कार्यरत थे, उन सभी के नाम एसआईटी न्यायालय को दे चुकी है। इन सभी प्रकरणों में प्राधिकरण ने 5 फरवरी 1982 और 8 अगस्त 1988 में किसानों ने जमीन अधिग्रहित की। शुरुआत में प्राधिकरण ने इन किसानों के लिए 10 रुपए 12 पैसे से लेकर 31 रुपए प्रति वर्ग गर्ज मुआवजा राशि तय की थी, लेकिन किसानों ने जिला और हाईकोर्ट में याचिका दायर की जहां से उनके पक्ष में बढ़ी दरों पर मुआवजा देने का आदेश प्राधिकरण को दिया गया। इसके बाद 2015 में अलग-अलग तारीखों में 297 रुपए प्रति वर्ग गर्ज की दर से मुआवजा पाने के लिए किसानों ने नोएडा प्राधिकरण में सीईओ के नाम समझौता प्रार्थना पत्र दिया।
