
आयुष्मान योजना में 3,167 अस्पतालों की धांधली उजागर
नई दिल्ली। राज्यसभा में जबलपुर से कांग्रेस सांसद विवेक तंखा द्वारा पूछे गए सवाल ने देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में भारी गड़बडिय़ों को उजागर कर दिया है। स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल राज्यसभा में गूंजे। जबलपुर से कांग्रेस सांसद विवेक तंखा ने मंगलवार को केंद्र सरकार से जानकारी मांगी थी कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत कितने अस्पतालों को गड़बडिय़ों का दोषी पाया गया, किस प्रकार की अनियमितताएं हुई और अब तक क्या कार्रवाई की गई है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने सदन में बताया कि आयुष्मान भारत कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत अब तक 3167 अस्पताल गड़बडिय़ों और धोखाधड़ी के दोषी पाए गए हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय दी गई जानकारी में बताया गया है कि योजना की शुरुआत से अब तक 3,167 अस्पतालों को विभिन्न प्रकार की अनियमितताओं और नियम उल्लंघन का दोषी पाया गया है। यह संख्या दिखाती है कि देशभर में लाभार्थियों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं पर किस तरह का संकट मंडरा रहा है।
सामने आई मुख्य गड़बडिय़ां
केंद्र सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, योजना में कई तरह की गड़बडिय़ां सामने आई हैं। फर्जी मरीजों के नाम पर क्लेम लिया गया है। मरीजों से ओवरचार्जिंग और ज्यादा बिल वसूली की गई है। लाभार्थियों को योजना की सेवाओं से वंचित किया गया है। इस संदर्भ में 1114 अस्पतालों की मान्यता रद्द की गई है। 549 अस्पताल निलंबित किए गए हैं, वहीं 1504 अस्पतालों पर 122 करोड़ का जुर्माना लगाया गया है। मंत्री ने बताया कि धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर नेशनल एंटी फ्रॉड यूनिट और राज्यों में स्टेट एंटी फ्रॉड यूनिट्स गठित की गई हैं। ये संस्थाएं मिलकर गहन जांच कर रही हैं और दोषी अस्पतालों पर कार्रवाई सुनिश्चित कर रही हैं।
पारदर्शिता के लिए कदम
सरकार ने सभी राज्यों को रियल टाइम डैशबोर्ड उपलब्ध कराया है, जिससे तुरंत निगरानी की जा सके और योजनाओं में पारदर्शिता बनी रहे।
