Spread the love

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने जजों की कार्य प्रतिबद्धता पर जताई नाराजगी
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने मंगलवार को एक कार्यक्रम में हाईकोर्ट के कुछ जजों की कार्य प्रतिबद्धता पर कड़ी नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि जहां कई जज न्याय के मशालची बनकर भारी बोझ उठाते हैं, वहीं कुछ की कार्यशैली निराशाजनक है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिनकी निष्ठा कमजोर पड़ जाती है, उनसे मेरी अपील है। हर रात तकिए पर सिर रखने से पहले खुद से पूछें कि आज मुझ पर जनता का कितना पैसा खर्च हुआ? क्या मैंने समाज के विश्वास का प्रतिदान दिया?
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि हाल के वर्षों में एक विरोधाभासी स्थिति बन गई है, जहां न्याय तक पहुंच केवल संपन्न वर्ग तक सीमित होती जा रही है। उन्होंने कहा कि जब कानूनी फीस मासिक आय से भी ज्यादा हो जाती है, जब प्रक्रियाएं उस साक्षरता की मांग करती हैं जो करोड़ों लोगों के पास नहीं है और जब न्यायालय की गलियारों में लोग स्वागत से ज्यादा भय महसूस करते हैं तो यह वास्तविकता है कि हमने न्याय के मंदिर तो बनाए पर उनके दरवाजे उन्हीं के लिए संकरे कर दिए जिनके लिए वह बने थे।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने निःशुल्क कानूनी सहायता की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि यह कोई कानूनी दान नहीं बल्कि संवैधानिक ऑक्सीजन है, जो लोकतंत्र की जीवनरेखा है। उन्होंने उदाहरण देते कहा कि कैसे कानूनी सहायता के जरिए एक बुज़ुर्ग व्यक्ति ने धोखाधड़ी से गंवाई अपनी जीवन भर की पूंजी वापस पाई। उन्होंने बताया कि नालसा की ‘वीर परिवार सहायता योजना’ जैसे प्रयास सैनिकों और उनके परिवारों को दूरस्थ क्षेत्रों में भी कानूनी सहारा दिलाने में अहम साबित हो रहे हैं।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी में करीब 4,600 कैदियों को कानूनी प्रतिनिधित्व देने के लिए आगे आए वकीलों, विशेषकर युवाओं की तारीफ की। उन्होंने वरिष्ठ वकीलों से हर माह कम से कम दो प्रो बोनो मामले लेने का भी आह्वान किया।
जस्टिस सूर्यकांत ने लंबित मामलों और न्याय में हो रही देरी को बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि कई बार न्याय में देरी ही न्याय से इनकार बन जाती है। हमें तय करना होगा कि न्याय तक पहुंच केवल कागजों पर गारंटी न रहे।
उन्होंने मध्यस्थता के महत्व पर भी बल दिया और कहा कि यह न्यायिक प्रक्रिया के विपरीत रिश्तों को तोड़ने के बजाय बचाए रखती है। उन्होंने मेडिटेशन फॉर द नेशन अभियान की सफलता का जिक्र करते हुए 2030 तक हर जिले में समर्पित मध्यस्थता केंद्र स्थापित करने का संकल्प व्यक्त किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *