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न्यायालय ने बंद की फाइल, हिल गई थी राजीव सरकार…..

2018 में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सीबीआई की अपील भी खारिज कर दी थी

नई दिल्ली। करीब चार दशक से देश की राजनीति और न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा रहे बोफोर्स घोटाले का कानूनी अध्याय अब पूरी तरह बंद हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट के वर्ष 2005 के फैसले को चुनौती देने वाली अंतिम लंबित याचिका खारिज कर दी। इसी के साथ हिंदूजा बंधुओं और स्वीडिश हथियार निर्माता कंपनी एबी बोफोर्स को बरी करने के हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ बची आखिरी न्यायिक चुनौती भी समाप्त हो गई।

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दो दिवंगत प्रतिवादियों के नाम हटाने के लिए समय मांगे जाने पर इसे स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि जब संबंधित कार्यवाही पहले ही समाप्त हो चुकी है और मामला वर्षों पुराना है, तब इसे आगे बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है। इसके बाद अदालत ने याचिका खारिज कर दी।

इस फैसले के साथ बोफोर्स मामले में सभी कानूनी चुनौतियों का अंत हो गया। इससे पहले वर्ष 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सीबीआई की अपील भी खारिज कर दी थी। अदालत ने माना था कि अपील निर्धारित समय से 4,522 दिन की देरी से दायर की गई थी और देरी का संतोषजनक कारण प्रस्तुत नहीं किया गया।

दिल्ली हाई कोर्ट ने 31 मई 2005 को हिंदूजा बंधुओं और एबी बोफोर्स के खिलाफ सभी आपराधिक आरोप रद्द कर दिए थे। उस समय अदालत ने जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर भी टिप्पणी करते हुए कहा था कि इस मामले की जांच में सरकारी संसाधनों का व्यापक उपयोग हुआ, लेकिन अभियोजन अपने आरोपों को प्रभावी ढंग से साबित नहीं कर सका। बोफोर्स मामला वर्ष 1986 में भारतीय सेना के लिए 155 मिमी हॉवित्जर तोपों की खरीद से जुड़े 1,437 करोड़ रुपये के रक्षा सौदे से जुड़ा था। वर्ष 1987 में इस सौदे में कथित तौर पर अवैध कमीशन दिए जाने के आरोप सामने आए, जिसके बाद यह देश के सबसे चर्चित राजनीतिक विवादों में शामिल हो गया। इसके बाद सीबीआई ने कई लोगों के खिलाफ एफआईआर और आरोपपत्र दाखिल किए, लेकिन समय के साथ कई आरोपी दिवंगत हो गए और विभिन्न अदालतों के फैसलों के बाद मामला धीरे-धीरे कमजोर पड़ता गया। अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के साथ इस बहुचर्चित मामले का कानूनी पटाक्षेप हो गया है।

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