
अर्ध-विधिक स्वयंसेवक जुड़वाएंगे वोटर लिस्ट में नाम
नई दिल्ली। बिहार में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन अभियान को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि 1 सितंबर की डेडलाइन खत्म होने के बाद भी दावे, आपत्तियां और सुधार से जुड़े दस्तावेज स्वीकार किए जाएं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि एसआईआर प्रक्रिया को लेकर राज्य में काफी हद तक विश्वास का संकट बना हुआ है, इसलिए राजनीतिक दलों को इसमें सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। साथ ही, कोर्ट ने बिहार विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिया है कि वह मतदाताओं और राजनीतिक दलों की सहायता के लिए अर्ध-विधिक स्वयंसेवकों की नियुक्ति करे।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ये अर्ध-विधिक स्वयंसेवक संबंधित जिला न्यायाधीशों के समक्ष गोपनीय रिपोर्ट सौंपेंगे, जिन पर अगली सुनवाई में 8 सितंबर को विचार किया जाएगा। आरजेडी और एआईएमआईएम की याचिका पर सुनवाई के दौरान भारत निर्वाचन आयोग ने कोर्ट को बताया कि बिहार में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में कुल 2.74 करोड़ मतदाताओं में से 99.5 प्रतिशत लोगों ने अब तक पात्रता दस्तावेज जमा कर दिए हैं। आयोग ने यह भी कहा कि आरजेडी द्वारा 36 दावे दायर करने का दावा गलत है, दरअसल केवल 10 दावे ही दर्ज हुए हैं। जिन मतदाताओं के दस्तावेज अधूरे हैं, उन्हें 7 दिन के भीतर नोटिस भेजने की प्रक्रिया जारी है, जो निरंतर चलती रहती है।
बिहार में मतदाताओं को मिलेगी कानूनी मदद
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिया कि वह दावे, आपत्तियां दाखिल करने में मतदाताओं, राजनीतिक दलों की सहायता के लिए अर्ध-विधिक स्वयंसेवकों को तैनात करे। साथ ही, उच्चतम न्यायालय ने अर्ध-कानूनी स्वयंसेवकों से जिला न्यायाधीशों के समक्ष गोपनीय रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है, जिस पर 8 सितंबर को विचार किया जाएगा। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि बिहार एसआईआर प्रक्रिया पर भ्रम काफी हद तक विश्वास का मुद्दा है। उसने राजनीतिक दलों से इस मामले में सक्रियता दिखाने को कहा।ॉ
इतने बड़े राज्य में सिर्फ 120 मामले
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि इतने बड़े राज्य में केवल 120 मामलों की ही आपत्तियां सामने आ रही हैं। यह हैरान करने वाला है। चुनाव आयोग की तय प्रक्रिया ही मानक है और उसी का पालन होना चाहिए। आधार कार्ड पर इतना जोर क्यों दिया जा रहा है? हम बार-बार एक ही आदेश नहीं दे सकते। अंतिम मतदाता सूची 1 अक्टूबर को प्रकाशित होगी। राजनीतिक दल सक्रिय रहकर मतदाताओं की आपत्तियां दर्ज कराने में मदद करें, कोर्ट ने यह भी कहा। आधार कार्ड को लेकर विवाद पर 8 सितंबर को फिर सुनवाई हो सकती है, बशर्ते ठोस उदाहरण रखे जाएं।
पार्टियों क्या कर रही हैं
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने चुनाव आयोग से कई सवाल पूछे। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि राजनीतिक दलों की निष्क्रियता हैरान करने वाली है। राज्य की 12 पॉलिटिकल पार्टियों में से यहां मात्र 3 पार्टियां ही कोर्ट में आई हैं। वोटर्स की मदद के लिए आप क्या कर रहे हैं। कोर्ट ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि राजनीतिक दलों के लगभग 1.6 लाख बूथ लेवल एजेंट होने के बावजूद, उनकी ओर से केवल दो आपत्तियां ही आई हैं।
