तथ्य छिपाकर दायर की गई याचिका खारिज

जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने अपनी तल्ख टिप्पणी में कहा कि गंदे हाथ से आया हुआ व्यक्ति किसी प्रकार की राहत का अधिकारी नहीं है।कोर्ट ने तथ्य छिपाकर दायर की गई याचिका निरस्त करते हुए याचिकाकर्ता पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगा दिया। यह राशि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के खाते में जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। मैहर जिला अंतर्गत पीपाखेड़ा निवासी दीपेंद्र सिंह ने याचिका दायर कर एसडीएम राजस्व द्वारा वसूली के लिए जारी आरसीसी को चुनौती दी थी। विगत 26 अगस्त को सुनवाई के दौरान एसडीएम राजस्व ने हा ईकोर्ट में उपस्थित होकर बताया था कि उन्हें पदभार ग्रहण किए हुए एक माह हुआ है। उन्होंने पूर्व एसडीएम द्वारा की गई कार्यवाही के संबंध में हलफनामा प्रस्तुत करने में खुद को असमर्थ बताया था। इस पर कोर्ट ने मैहर कलेक्टर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए थे। निर्देश के पालन में 28 अगस्त को मैहर कलेक्टर हाई कोर्ट में हाजिर हुईं। उन्होंने कोर्ट को बताया कि लिपिक द्वारा याचिका की जानकारी ओआईसी को नहीं दी गई थी। लिपिक को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए उसके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही की अनुशंसा की गई है। उन्होंने कोर्ट को अवगत कराया कि याचिकाकर्ता के विरुद्ध ईओडब्ल्यू ने मुकदमा दर्ज किया था। याचिकाकर्ता ने इस मामले में न्यायालय से जमानत प्राप्त नहीं की है। शासकीय राशि की वसूली के लिए याचिकाकर्ता को दो बार नोटिस जारी किया गया था। याचिकाकर्ता की तरफ से नोटिस का जवाब नहीं दिया गया। जिसके बाद राशि वसूली के लिए आरसीसी जारी की गई। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि याचिकाकर्ता ने उसके विरुद्ध एफआइआर दर्ज होने का उल्लेख याचिका या सुनवाई में नहीं किया था। इस पर कोर्ट ने जमकर नाराजगी जताई।
