
आदिवासी समाज ने रैली निकालकर कलेक्ट्रेट और वन संरक्षक कार्यालय का किया सांकेतिक घेराव
बालाघाट। वन परिक्षेत्र लालबर्रा के सोनेवानी अभयारण्य में मादा बाघ की मौत के मामले में डीएफओ अधर गुप्ता के निलंबन और गिरफ्तार 6 कर्मचारियों के रिहाई की मांग को लेकर मंगलवार को आदिवासी समाज ने जोरदार प्रदर्शन किया। मध्यप्रदेश आदिवासी विकास परिषद के बैनर तले रैली निकाली गई, जो कलेक्ट्रेट और वन संरक्षक कार्यालय तक पहुंची। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी की और कलेक्ट्रेट का सांकेतिक घेराव कर ज्ञापन सौंपा। इसके बाद वन संरक्षक कार्यालय में भी विरोध जताया गया। मांगे पूरी नहीं होने पर बालाघाट जिला बंद करने की चेतावनी दी है।
मंगलवार को आदिवासी समाज ने वीरांगना रानी दुर्गावती भवन से एक रैली निकाली। रैली में शामिल लोगों ने डीएफओ अधर गुप्ता को निलंबित किए जाने सहित अन्य मांगों की तख्ती हाथों में लेकर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने जमकर नारेबाजी भी की। यह रैली सीधे कलेक्ट्रेट पहुंची, जहां उन्होंने सांकेतिक रुप से कलेक्ट्रेट का घेराव कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। इसके बाद रैली वन संरक्षक कार्यालय पहुंची, जहां पर भी उन्होंने विरोध जताया।
आदिवासी समाज के कर्मचारियों को गिरफ्तार करने का विरोध
बाघ की रहस्यमय मौत और उसके शव को बिना प्रोटोकॉल के जला दिए जाने के मामले में 6 आदिवासी वन सुरक्षा श्रमिकों को गिरफ्तार किया गया है, जिससे आदिवासी समाज नाराज है। 20 दिन पूर्व आदिवासी विकास परिषद ने प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में डीएफओ अधर गुप्ता के निलंबन और निर्दोष आदिवासियों को छोडऩे की मांग की थी। लेकिन इस ज्ञापन पर प्रशासन ने कोई कार्यवाही नहीं की है, जिसके कारण आदिवासी समाज और आक्रोशित हो गया। मंगलवार को एक बार पुन: उन्होंने प्रदर्शन किया।
मांगे पूरी नहीं हुई तो बालाघाट जिला किया जाएगा बंद
मध्य प्रदेश आदिवासी विकास परिषद जिला अध्यक्ष दिनेश धुर्वे ने बताया कि शासन-प्रशासन यदि उनकी मांगों का निराकरण नहीं करती है तो आगामी समय में बालाघाट जिला बंद कर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। मंगलवार को सांकेतिक रुप से प्रदर्शन किया गया था। उन्होंने बताया कि बाघ की मौत के मामले में आदिवासी कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि वे उच्च अधिकारियों के निर्देश का पालन कर रहे थे। जबकि विभाग के वनरक्षक, डिप्टी रेंजर अब भी फरार है, जिन्हें पुलिस ने खोज नहीं पाई है। यदि मृत बाघ का पोस्टमार्टम हो जाता तो उसकी मौत के कारण का पता चल जाता। उन्होंनें मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही की जाए। डीएफओ अधर गुप्ता को तत्काल निलंबित किया जाए।
ये है मामला
वन परिक्षेत्र लालबर्रा के बहियाटिकुर बीट के वन कक्ष क्रमांक 443 में 27 जुलाई को पोटुटोला नहर के पास नाले में मरा बाघ दिखाई दिया था। डिफ्टी रेंजर टीकाराम हनोते और वनरक्षक हिमांशु घोरमारे के कहने पर सुरक्षा श्रमिक चौकीदारों ने 29 जुलाई को सुखी लकड़ी एकत्रित कर बाघ के शव को जलाकर नष्ट कर दिया था। यह मामला 2 अगस्त को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद आनन-फानन में वन विभाग ने मामले की जांच शुरु की। विभाग ने 8 आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया। 6 सुरक्षा श्रमिक चौकीदार हरिलाल, शिवकुमार, शैलेष, अनुज, मानसिंह और देवसिंह को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया। जबकि इसी मामले में डिफ्टी रेंजर टीकाराम हनोते और वनरक्षक हिमांशु घोरमारे को निलंबित कर दिया है, जो कि अभी तक फरार चल रहे हैं। प्रकरण में प्रधान मुख्य वनसंरक्षक एवं वन बल प्रमुख ने डीएफओ अधर गुप्ता को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। विभाग ने जांच के लिए एसआईटी का गठन भी किया। इधर, इस मामले की जांच अब एसटीएसएफ कर रही है। जिसके चलते वन विभाग द्वारा गठित एसआईटी को भंग कर दिया गया है। एसटीएसएफ ने फरार डिप्टी रेंजर और वनरक्षक के खिलाफ ईनाम भी घोषित किया है।
