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इन्दौर। जिला उपभोक्ता आयोग ने एक प्रसूता की आपरेशन के बाद से ही लगातार तबीयत बिगड़ने और उसके इलाज दौरान मौत को डाक्टर की लापरवाही मानते हुए साढ़े 17 लाख रुपए जुर्माना लगा राशि मृतका के परिजनों को अदा करने के आदेश दिए आयोग के आदेशानुसार इस जुर्माना राशि में से बीमा कंपनी 10 लाख रुपए मृतका के परिजन को देगी। शेष साढ़े सात लाख रुपए डाक्टर को देने होंगे। जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष विकास राय, सदस्य लालजी तिवारी और सरोज मिमरोट ने प्रसूता पूजा की मौत के बाद पूजा के पति राहुल प्रजापत और दोनों बच्चों की और से दायर याचिका पर सुनवाई उपरांत अपने निर्णय में इन्दौर के जावरा कंपाउंड स्थित करुणा मेटरनिटी एवं नर्सिंग होम और डॉ. हेमंत कंसल पर उपभोक्ता आयोग ने साढ़े 17 लाख रुपए का जुर्माना लगाते माना कि महिला की मौत डॉ. कंसल की लापरवाही से हुई थी। उन्होंने डिलीवरी होने के एक दिन बाद ही दूरबीन पद्धति से प्रसूता का नसबंदी ऑपरेशन कर दिया था। जबकि, भारत सरकार की गाइड लाइन है कि प्रसव के 42 दिन तक दूरबीन पद्धति से ऑपरेशन नहीं किया जा सकता है। आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि जुर्माने की राशि में से 10 लाख रुपए ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी वहन करेगी, जबकि शेष साढ़े सात लाख रुपए डॉ. कंसल को देने होंगे। याचिका कहानी संक्षेप में इस प्रकार है कि बिचौली मर्दाना निवासी पूजा प्रजापत को प्रसव के लिए 2 जुलाई 2017 को करुणा मेटरनिटी एवं नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। 3 जुलाई को पूजा ने बच्चे को जन्म दिया। इसके अगले ही दिन डॉ. कंसल ने उनका नसबंदी का ऑपरेशन किया था जिसके बाद 5 जुलाई को पूजा को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। कुछ दिन में पूजा को ऑपरेशन वाली जगह घाव हो गया। उन्हें 19 जुलाई को दोबारा अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टर ने कहा कि ऑपरेशन करना पड़ेगा। 21 जुलाई को ऑपरेशन के बाद भी हालत नहीं सुधरी तो 25 जुलाई को पूजा को दूसरे अस्पताल रेफर कर दिया। वहां लगभग एक माह तक भर्ती रहने के बाद 25 अगस्त 2017 को उनकी मौत हो गई। जिसके बाद उसके पति और बच्चों की और से उपभोक्ता फोरम में केस लगाया जिस पर फोरम ने सुनवाई करते निर्णय सुनाया।

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