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पहले दिन सुबह और शाम को हुई 30 सफारी
बालाघाट। मानसून सत्र के बाद 1 अक्टूबर से कान्हा नेशनल पार्क के गेट खोल दिए गए हैं। तीन माह बाद खुले नेशनल पार्क में पहले दिन देसी-विदेशी पर्यटकों ने सफारी की। इस दौरान पर्यटकों ने वन्य प्राणियों के दीदार किए। सफारी से पूर्व पार्क प्रबंधन ने सभी पर्यटकों का स्वागत किया। इसके पूर्व मुक्की गेट पर पार्क प्रबंधन ने पूजा-अर्चना भी की। जिले में पर्यटकों ने मुक्की गेट से पार्क में प्रवेश किया। पहले दिन सुबह और शाम की पाली में 30 सफारी की गई।
जानकारी के अनुसार मानसून सत्र के चलते कान्हा नेशनल पार्क को जुलाई माह से पर्यटकों के लिए बंद कर दिया जाता है। इस दौरान पार्क में कोई सफारी नहीं होती है। 1 अक्टूबर से पुन: इसे खोला जाता है। प्रतिवर्ष की भांति पार्क प्रबंधन ने बुधवार को सफारी के लिए पहुंचे पर्यटकों का पहले स्वागत किया। इसके बाद उन्हें जंगल में सफारी के लिए जाने दिया। पार्क के गेट खोले जाने से पूर्व प्रबंधन ने जंगल के अंदर बने अस्थायी पुलों में सुधार कार्य आने-जाने वाले मार्ग में साफ-सफाई सहित अन्य जरूरी तैयारियां पूरी कर ली थी। पार्क प्रबंधन के अनुसार कान्हा राष्ट्रीय पार्क में हर साल देशी और विदेशी सैलानी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। उन्हें पार्क भ्रमण में किसी तरह की परेशानी न हो इसके लिए पार्क के अंदर आने-जाने वाले मार्ग की साफ-सफाई सहित अस्थायी पुलों में सुधार कार्य करा लिया जाता है।
उल्लेखनीय है कि कान्हा नेशनल पार्क 940 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। देश का सबसे बड़ा नेशनल पार्क है। बारिश के बाद कान्हा नेशनल पार्क और भी सुंदर हो जाता है। पार्क में अनेक झरने हैं, जो इसकी नैसर्गिक सुंदरता में चार चांद लगाते हैं। इसके अलावा वन्यप्राणी और वन्य जीव भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षिक करते हैं।
विदेशी पर्यटकों ने की सफारी
कान्हा नेशनल पार्क के खुलते ही बुधवार को विदेशी पर्यटकों ने जंगल सफारी की। बताया गया है कि पहले दिन केन्या और दुबई के पर्यटक पुणे के शख्स के साथ कान्हा नेशनल पार्क पहुंचे थे। विदेशी पर्यटक सुबह की ही शिफ्ट में सफारी के लिए पहुंच गए थे। पर्यटकों के अनुसार उन्होंने दुनिया के अनेक नेशनल पार्क में सफारी की। लेकिन कान्हा नेशनल पार्क जैसा घना जंगल देखने को नहीं मिला है। हालांकि, कान्हा नेशनल पार्क में पहली बार आए और बाघ के दिखने उम्मीद थी। लेकिन उन्हें बाघ के दीदार नहीं हो पाए, जिससे उन्हें निराशा हाथ लगी। वहीं दूसरे वन्य प्राणियों के दीदार होने से उनका मन प्रफुल्लित हो गया। इसी तरह कोलकाता, बिहार, मध्यप्रदेश सहित देश के अन्य राज्यों से भी सफारी के लिए पर्यटक कान्हा नेशनल पार्क पहुंचे थे। देसी पयर्टकों का कहना है कि बारिश के बाद कान्हा नेशनल पार्क और भी सुंदर हो जाता है। जंगल की नैसर्गिक सुंदरता सभी का मन मोह लेती है। वहीं वन्य प्राणियों के दीदार होने से सफारी का रोमांच और भी बढ़ जाता है।
पर्यटकों से गुलजार हुआ पार्क
बारिश के बाद अब कान्हा नेशनल पार्क पुन: पर्यटकों से गुलजार गया है। पार्क के कोर और बफर एरिया में पर्यटन शुरू कर दिया गया है। बाघ का दीदार करने के लिए देश विदेश से पर्यटक कान्हा पहुंचने लगे हैं। वर्षा के बाद कोर एरिया के किसली, मुक्की, कान्हा और सरही जोन में 1 अक्टूबर से पर्यटन शुरू कर दिया गया है। पार्क प्रबंधन का मानना है कि पहले की अपेक्षा इस वर्ष पर्यटकों की संख्या में इजाफा हो रहा है। बताया गया है कि बफर एरिया में भी पर्यटन किया जाता है। यहां नाइट सफारी भी कराई जाती है।

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